लालकुआं : बिजली के तीन बिल रद्द, उपभोक्ता को 30 हजार के मुआवजे के आदेश

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लालकुआँ/नैनीताल। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नैनीताल ने बिजली विभाग की लापरवाही और सेवा में कमी को गंभीर मानते हुए उपभोक्ता हरी किशन पनेरू के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने बिजली विभाग द्वारा जारी 7 जून 2023 का 18,748 रुपये, 10 फरवरी 2024 का 30,044 रुपये और 10 सितंबर 2024 का 55,179 रुपये का बिजली बिल पूरी तरह निरस्त (खारिज) कर दिया है। साथ ही विभाग को मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये, कुल 30 हजार रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

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परिवादी हरी किशन पनेरू ने अधिवक्ता जयबीर सिंह एवं आदित्य कुमार के माध्यम से आयोग में परिवाद दायर किया था। परिवाद में आरोप लगाया गया कि बिजली विभाग ने मनमाने ढंग से अत्यधिक राशि के बिजली बिल जारी किए, जबकि उपभोक्ता नियमित रूप से बिलों का भुगतान करता रहा। शिकायत और विधिक नोटिस देने के बावजूद विभाग ने समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं किया, जिसके बाद उपभोक्ता को आयोग की शरण लेनी पड़ी।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वर्ष 2022 तक उपभोक्ता के बिजली बिल कुछ सौ रुपये के बीच थे, लेकिन बिना ठोस आधार के विभाग ने अचानक हजारों रुपये के बिल जारी कर दिए। आयोग ने इसे विभाग की लापरवाही, असावधानी और सेवा में कमी माना।

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आयोग ने अपने आदेश में बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि 14 दिसंबर 2022 से बिजली बिलों का पुनर्गणना अधिकतम 250 रुपये प्रतिमाह के आधार पर किया जाए। साथ ही उपभोक्ता द्वारा पहले जमा किए गए 9,924 रुपये और बाद में जमा किए गए 20 हजार रुपये को समायोजित कर यदि कोई अतिरिक्त राशि विभाग के पास बचती है तो उसे उपभोक्ता को वापस लौटाया जाए।

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इसके अलावा आयोग ने विभाग को 45 दिनों के भीतर 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अलग से अदा करने का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 71 एवं 72 के तहत विभाग के विरुद्ध वसूली, अर्थदंड और कारावास की कार्रवाई की जा सकती है।

बिजली विभाग की ओर से अधिवक्ता कैलाश चंद, मुकेश चंद्र, यशपाल आर्य और भारती आर्या ने पक्ष रखा।

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