हल्द्वानी : एडवांस रोबोटिक कैंसर सर्जरी से उत्तराखंड की 61-वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

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बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल में एडवांस रोबोटिक कैंसर सर्जरी से उत्तराखंड की 61-वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

हल्द्वानी: बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एडवांस रोबोटिक सर्जरी के जरिए हल्द्वानी की 61-वर्षीय महिला का सफल इलाज कियाI इस इलाज से वह एक गंभीर प्री-कैंसरस गर्भाशय की समस्या से उबरकर फिर से सामान्य और सक्रिय जीवन जी रही हैं। नैनीताल जिले के हल्द्वानी के पास तल्ली बमौरी की रहने वाली गृहिणी, श्रीमती पूनम रौतेला को पिछले एक महीने से पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग हो रही थी, जिससे संभावित कैंसर को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

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लक्षणों और मेडिकल रिपोर्ट्स में यूटरस की लाइनिंग मोटी होने के संकेत मिलने के बाद, श्रीमती रौतेला और उनका परिवार स्पेशलाइज्ड इलाज की तलाश में नई दिल्ली पहुंचे। बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में जांच के बाद उन्हें एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया डायग्नोज हुआ, जो एक गंभीर प्री-कैंसरस कंडीशन है और समय पर इलाज न होने पर यूटराइन कैंसर में बदलने का हाई रिस्क रहता है। केस की कॉम्प्लीकेशन को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जिकल इंटरवेंशन की सलाह दी।
इस केस पर बात करते हुए बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के गायनेकोलॉजिकल सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट – डॉ. अल्का दहिया, ने कहा, “पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अक्सर किसी अंदरूनी समस्या, जैसे प्री-कैंसरस या कैंसरस कंडीशन का शुरुआती संकेत हो सकता है। श्रीमती रौतेला के मामले में समय पर डायग्नोसिस से हमें कैंसर में बदलने से पहले ही हस्तक्षेप करने का मौका मिला। हमने रोबोटिक-असिस्टेड हिस्टरेक्टॉमी के साथ ओवरीज़ को हटाने और लिम्फ नोड सैंपलिंग का विकल्प चुना, जिससे बेहतर प्रिसिशन, कम ब्लड लॉस और तेज रिकवरी संभव हो सकी। रोबोटिक सर्जरी में 3D मैग्निफाइड व्यू और बेहतर डेक्सटेरिटी मिलती है, जो खासतौर पर कॉम्प्लेक्स गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी केस में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करती है।”
सर्जिकल टीम ने हाई-प्रिसिशन रोबोटिक सिस्टम की मदद से यूटरस, दोनों ओवरीज़ और फॉलोपियन ट्यूब्स के साथ आसपास के लिम्फ नोड्स को सफलतापूर्वक हटाया। पारंपरिक ओपन सर्जरी के विपरीत, यह मिनिमली इनवेसिव तकनीक छोटे-छोटे चीरे के जरिए की गई, जिससे सर्जरी अधिक सटीक और सुरक्षित बनी। इस तरीके से सर्जिकल ट्रॉमा, ऑपरेशन के बाद दर्द, हॉस्पिटल में रहने की अवधि और रिकवरी टाइम में काफी कमी आई, जो विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए फायदेमंद है।
डॉ. दहिया, ने आगे बताया, “सर्जरी के तुरंत बाद ही श्रीमती रौतेला की रिकवरी काफी अच्छी रही। उन्होंने जल्दी ही खाना-पीना शुरू कर दिया और चलने-फिरने लगीं, जो स्मूद पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी को दर्शाता है। अगले कुछ दिनों में उनकी शारीरिक कार्यक्षमता सामान्य हो गई और उन्हें एक स्ट्रक्चर्ड फॉलो-अप प्लान के साथ स्थिर स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया।”
मरीज और उनके परिवार के लिए छोटे पहाड़ी शहर से दिल्ली के एक बड़े टर्शियरी केयर हॉस्पिटल तक का सफर चिंता और डर से भरा था, खासकर कैंसर और बड़ी सर्जरी के डर को लेकर। हालांकि, रोबोटिक टेक्नोलॉजी के उपयोग ने न केवल सर्जरी के शारीरिक प्रभाव को कम किया, बल्कि बड़े चीरे और लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती रहने से बचाकर उन्हें मानसिक रूप से भी भरोसा दिया।
यह सफल केस बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की एडवांस, पेशेंट-सेंट्रिक कैंसर केयर देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। अत्याधुनिक रोबोटिक टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता के साथ, हॉस्पिटल देशभर के मरीजों को सटीक इलाज, तेज रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करते हुए गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी में नए मानक स्थापित कर रहा है।

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