
‘बखता त्यार बलाई ल्हयून’ सटीक बैठती है शेरदा ‘अनपढ़’ की ये रचनाएं
च्यल मारनो बाप कै लात, सास ज्वेड़ने ब्वारी हाथ, च्याल ब्वारियोक खिलखिलाट, ओ बाज्यू बुढ़

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भगवान विष्णु को शंख ध्वनि सबसे अधिक प्रिय है।और भगवान विष्णु की प्रत्येक तस्वीरों में

भाँग (मरजुआना) हमारी परंपरा में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। अगर यह

ग्राम्य जीवन में मुर्गे का मनुष्य जीवन से गहरा सांस्कृतिक संबंध रहा है। उसकी बड़े

24 अप्रैल 1884 यह दिन कुमाऊ के इतिहास में लिखा जाने वाला था क्योंकि इसी

शिक्षक बनने से पहले शिक्षक प्रशिक्षण लेना होता है। यह एक ट्रेनिंग कॉलेज की कथा

हम सभी ने नौले के अंदर से पानी के कनस्तर को निकाला और नौले की

गर्मी की छुट्टियाँ किसी उत्सव से कम नहीं होती थी। बीस मई को नतीजा निकलता

इस कहानी में एक जोशीले ड्राइवर की कथा के बहाने उस दौर के गँवई परिवेश

हमारे एक सहपाठी थे। वे अभिभावकों को अपने परीक्षा-परिणाम का ठीक विपरीत फल बताते थे।