
‘बात पहाड़ की’ लोकगायक बीके सामंत की कलम से (भाग 3)
पहाड़ व पहाड़ का गीत संगीत . वो घर के आँगन की सींढ़ीयों पे बैठकर

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पिछले भाग से …. पहाड़ व पहाड़ के त्यौहार ,,,करवाचौंथ ,, उस दिन मैं और

पहाड़ व पहाड़ के रोज़गार इस वर्ष 9 November को हमारा राज्य उत्तराखंड अपना बीसवाँ

पंछी की तरह बनकर उड़ जाऊं मैंलोगों से कुछ अलग कर दिखाऊं मैंआसान जिंदगी तो

भाँग (मरजुआना) हमारी परंपरा में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। अगर यह

सुबह घर से निकला. हाईवे पर देखा लंबी कतार देखकर बड़ा ताज्जुब हुआ. कतार जहाँ

ग्राम्य जीवन में मुर्गे का मनुष्य जीवन से गहरा सांस्कृतिक संबंध रहा है। उसकी बड़े

हल्द्वानी – कोविड19 वायरस जो पूरी दुनिया में तांडव मचा रहा है। जिसके वजह से

शिक्षक बनने से पहले शिक्षक प्रशिक्षण लेना होता है। यह एक ट्रेनिंग कॉलेज की कथा

बिखौती कुमाऊँ मनाए जाने वाला एक ऐसा त्यौहार जिसे गेंहू की फसल पकने और लहलाते