
“पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान” इस कहानी में एक जोशीले ड्राइवर की कथा के बहाने उस दौर के गँवई परिवेश का खाका खींचा गया है…
इस कहानी में एक जोशीले ड्राइवर की कथा के बहाने उस दौर के गँवई परिवेश

इस कहानी में एक जोशीले ड्राइवर की कथा के बहाने उस दौर के गँवई परिवेश

पहाड़ के संघर्ष भरे जीवन और सुनहरी यादों का प्रमाण घर के आंगन में बने

नये साल के आगमन पर हर कोई नये संकल्प लेता है। कुछ नया करने की

पहाड़ का नाम आते ही दिमाग में एक अलग सा चित्र बनने लगता है। बड़ी-बड़ी

आशिकी और आशिकों की कहानियां बहुत लंबी होती है। हर युवा की अलग ही कहानी
पहाड़ में नौला एक ऐसा स्थान है जहाँ से गांववासियों को पीने का शुद्ध पेय

ग्वाला शब्द ही पहाड़ के हर उस पहाड़ी के मन में अपना बचपन लौटा लाता

राज्य थानों के जैसे बिहेव कर रहे हैं. ‘लाश पुलिया के पूर्वी मुहाने पर थी

देश भयंकर कोरोनावायरस के चपेट से लड़ रहा है पूरे देश में लॉकडाउन है लेकिन

( कैसे बिताए हम ये 21 दिनों को ) जब दिन दहशहत भरे हो ,जब