राब्ता-रिश्ता

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

भुला हुआ सा खुद का, कोई राब्ता हूँ मैं.
अब कौन हूँ, ये आईने में ताकता हूँ मैं.

बैठा हु कितने साल से, मंज़िल पे बेफिकर
वो जा चुका है जिसपे, से वो रास्ता हूँ मैं.

वो जब तलक रहा, पता ही न चला वक्त.
अब एक दिन में, कई साल काटता हूँ मैं.

मैंने जो उससे पूँछा, कि मैं कौन हूँ तेरा.
उसने कहा कि, गुज़रा हुआ हादसा हूँ मैं.

जिस दिन से उसे भूलकर, जीने लगूँगा.
क्या होगा, यही सोचकर के काँपता हूँ मैं.

मनोज बचखेती….विश्वविद्यालय प्रतिनिधि बागेश्वर महाविद्यालय


ADVERTISEMENTSAd Ad Ad
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें