नैनीताल: तीसरी राष्ट्रीय युवा संसद में चित्रांश देवलियाल ने की उत्तराखंड की ओर से ठोस पैरवी

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  • तीसरी राष्ट्रीय युवा संसद में चित्रांश देवलियाल ने की
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नैनीताल। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि स्नातक के छात्र चित्रांश देवलियाल ने राजस्थान में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय पर्यावरण युवा संसद (एनईवाईपी) में उत्तराखंड की ओर से ठोस पैरवी करते हुए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के लिये प्रोद्योगिकी के साथ ही एआई (कृत्रिम कौशल) तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।


तीसरी राष्ट्रीय युवा संसद विगत 24-25 जनवरी को जयपुर विधानसभा में आयोजित की गयी। युवा संसद के लिये देश के 229 विश्वविद्यालयों से पहले चरण में 3500 से अधिक प्रखर छात्रों का चयन किया गया। इन छात्रों को फिर विभिन्न स्तरों पर स्क्रीनिंग टेस्ट से गुजरना पड़ा। इसके बाद देशभर से 220 छात्रों का युवा सांसदों के रूप में अंतिम चयन किया गया।
पंतनगर विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष के छात्र चित्रांश इन 220 छात्रों में शामिल होने में सफल रहे और उसे उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संदीप शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय युवा संसद में स्वच्छ वायु, जलवायु परिवर्तन के साथ ही कृषि सुधारों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन पर रोकथाम को लेकर अपने अपने सुझाव रखे गये।

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युवा सांसद चित्रांश देवलियाल ने अपने वक्तव्य में स्वच्छ वायु, जलवायु परिवर्तन के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिये ठोस नीति बनाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। कहा कि भारत दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में है और प्रदूषण मौन हत्यारे की तरह आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।
जलवायु परिवर्तन के लिये युवा सांसद ने हिमालयी राज्यों में वनाग्नि की बढ़ रही घटनाओं को भी जिम्मेदार माना। कहा कि उत्तराख्ंाड में जंगल की आग विकराल रूप धारण करती जा रही है। इससे देश के पर्यावरण के साथ ही जलवायु पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कहा कि इसके लिये ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गयी तो इसके परिणाम और विनाशकारी हो सकते हैं।
युवा सांसद ने माना कि नीतियां मौजूद हैं लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। संसाधनों की कमी और सरकारी विभागों में सामंजस्य का अभाव कोढ़ में खाझ का काम कर रहा है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही प्रोद्योगिकी और तकनीक को बढ़ावा देना होगा।

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ड्रोन तकनीक के साथ ही आधुनिक एआई तकनीक (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग आज करना लाजिमी होगा। साथ ही जन समुदाय की भागीदारी के साथ ही जनता में जागरूकता अभियान पर जोर दिया जाना चाहिए।

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