
कुमांऊनी रचना “देवभूमि भौत महान”
जय देव भूमि भौत महाना।हाँम करनूँ त्यौर गुणगाना।।पावन याँ छन चारों धामा।सारे जपि दुणिं सदा

जय देव भूमि भौत महाना।हाँम करनूँ त्यौर गुणगाना।।पावन याँ छन चारों धामा।सारे जपि दुणिं सदा

खिल रहा है गुलबहारबेल लिपट रही है ठांगरे सेखिल रहे हैं फूल-फूल्यड़ पीले- हरेडलिया फांटौ

मेरी छोटी सी खुशी के लिए सब कुछ सहन कर जाते है मेरे पापा ।

हर बच्चे के पहले सुपरहीरो से लेकर, जिंदगी की जद्दोजहद में आख़री आस होते हैं

पापा आप हो सबसे खास।हमारी छोटी सी जिन्दगी की सबसे बड़ी आस।। बचपन के वो

ओ देश के वीर जवानों, हिम्मत न हारना कभी ।तुम पर टिकी है देश की
उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं कुमाऊँनी लोक कला को देश विदेश तक देवभूमि को पहचान दिलाने

जिंदगी में सोच रखो तो उस चीटी की तरह । जो लाख गिरने के बाद

उसके बनाए जज्बात अब बिखरते होंगेमेरी तस्वीर को देखकर अब वह किसी ओर पे भड़कते

शत्रु जब अदृश्य हो,न तुम्हारे पास कोई शस्त्र हो।जीतना ही है तुम्हे इस युद्ध को,इक