
वरिष्ठ PCS अधिकारी ललित मोहन रयाल की पुस्तक “चाकरी चतुरंग” की समीक्षा IPS अमित श्रीवास्तव की जुबानी
व्यावहारिक- सामाजिक सन्दर्भों में ‘व्यवस्था’ का दृश्य-अदृश्य जितना व्यापक प्रभाव है साहित्यिक-सामाजिक विमर्श में ये

व्यावहारिक- सामाजिक सन्दर्भों में ‘व्यवस्था’ का दृश्य-अदृश्य जितना व्यापक प्रभाव है साहित्यिक-सामाजिक विमर्श में ये

साहित्यकार ललित मोहन रयाल एक कुशल गद्यकार हैं और अपनी विशेष व्यंग्य शैली के लिए

यात्रा का अनुभव एकल से सामूहिकता की प्रक्रिया है। कोई मनुष्य कभी अकेले यात्रा नहीं

लेखक अरुण कुकसाल के सद्य प्रकाशित यात्रा वृत्तांत ‘चले साथ पहाड़’ में लेखक ने अलग-अलग

Haldwani News- लोक सेवा के साथ लेखन में महारत हासिल कर चुके उत्तराखंड के वरिष्ठ

साल 1933 की बात है. गांधी पूना में थे और सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित

लेखक ललित मोहन रयाल द्वारा रचित ‘कारी तू कभी ना हारी’ पर वेबीनार के माध्यम

Haldwani News- कहते हैं प्रतिभा किसी किसी की मोहताज नहीं होती वह खुद अपनी पहचान

वरिष्ठ कथाकार बटरोही जी का कथा-संग्रह ‘अनाथ मुहल्ले के ठुल-दा’ अप्रैल 2021 में समय साक्ष्य

वरिष्ठ कथाकार बटरोही जी के कथा-संग्रह ‘एक बीते मुहल्ले की कहानी’ का दूसरा संस्करण समय