देहरादून :(बड़ी खबर) उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का रास्ता साफ, सरकार ने जारी किए निर्देश

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उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का रास्ता साफ, सरकार ने जारी किए निर्देश

उपनल कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का निर्देश जारी हो गया है.

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देहरादून: उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते को लेकर शासन ने अहम निर्देश जारी किए हैं. कर्मचारियों को नियुक्ति अवधि के आधार पर तीन चरणों में लाभ दिया जाएगा. 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों पर कार्रवाई जारी है, जबकि 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक के कर्मचारियों को 9 नवंबर 2026 और 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 तक के कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2027 से लाभ देने की प्रक्रिया शुरू होगी. अतिरिक्त कर्मचारियों के समायोजन और अधिसंख्यक पद सृजन की व्यवस्था भी तय की गई है.

कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है. शासन ने उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ दिए जाने को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. सैनिक कल्याण विभाग की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी पत्र में अलग-अलग श्रेणियों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों के लिए भुगतान और समायोजन की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है. यह फैसला हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन और पहले जारी शासनादेशों के क्रम में लिया गया है. सरकार ने कर्मचारियों को तीन चरणों में न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की व्यवस्था तय की है.

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तीन चरणों में मिलेगा न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता: शासन के निर्देश के मुताबिक उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ तीन चरणों में दिया जाएगा. पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त किए गए कर्मचारियों के संबंध में वर्तमान में कार्रवाई की जा रही है. दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की कार्रवाई 9 नवंबर 2026 से की जाएगी.

वहीं तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 तक नियुक्त कर्मचारियों को यह लाभ देने की कार्रवाई 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगी.इस तरह शासन ने अलग-अलग नियुक्ति अवधि के कर्मचारियों के लिए लाभ दिए जाने की समयसीमा तय कर दी है.

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2016 से पहले काम कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत: शासनादेश में उपनल कर्मचारियों की सेवा में लागू कृत्रिम व्यवधान यानी Artificial Break को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है. सैनिक कल्याण विभाग के 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में उल्लेखित निरंतर योजनित शर्त/प्रतिबंध को विलोपित करते हुए उन उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का लाभ देने की बात कही गई है, जो 1 जनवरी 2016 से पहले से काम कर रहे हैं और वर्तमान में भी कार्यरत हैं. इससे लंबे समय से सेवा दे रहे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी सेवा के बीच कृत्रिम ब्रेक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी.

अतिरिक्त उपनल कर्मचारियों का होगा समायोजन: शासन ने ऐसे विभागों के लिए भी व्यवस्था तय की है, जहां स्वीकृत पदों की तुलना में अतिरिक्त उपनल कर्मचारी काम कर रहे हैं. ऐसे मामलों में नियुक्ति की तारीख यानी डेट ऑफ ज्वाइनिंग के आधार पर वरिष्ठता क्रम में पहले कर्मचारियों को स्वीकृत पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा.बाकी उपनल कर्मचारियों को दूसरे विभागों में उपलब्ध समकक्ष रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा. यदि ऐसा संभव नहीं होता है तो अधिसंख्यक पदों का सृजन किया जाएगा.

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इसके लिए शासन स्तर पर अलग व्यवस्था और समिति गठित किए जाने की बात कही गई है.वहीं दूसरे विभागों में स्वीकृत या अधिसंख्यक पदों के सापेक्ष समायोजन होने तक संबंधित कर्मचारियों को सैनिक कल्याण विभाग के 3 फरवरी 2026 के शासनादेश के अनुसार मानदेय का भुगतान किया जाएगा. समायोजन या अधिसंख्यक पद सृजित होने के बाद 1 मार्च 2026 से वास्तविक समायोजन तक की अवधि के अंतर की धनराशि के एरियर का भुगतान भी किया जाएगा.

बोर्ड-निगमों को अपने संसाधनों से करना होगा भुगतान: शासन ने निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के लिए भी स्थिति साफ कर दी है. हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में इन संस्थाओं को अपने स्तर पर उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता देने पर निर्णय लेना होगा. इसका भुगतान संबंधित निगम या संस्था को अपने संसाधनों से करना होगा और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी.

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