उत्तराखंड- अगर रोगों से रहना है दूर, तो जीवन शैली में लाना होगा बदलाव: रुचिता उपाध्याय

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  • जीवनशैली में बदलाव से बीमारियों का बोझ होगा कम: रूचिता उपाध्याय

Dehradun – विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गैर-संचारी रोगों के कारण हर साल 41 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है, जो विश्व स्तर पर सभी मौतों के 71 प्रतिशत के बराबर है। चिंताजनक रूप से, 15 मिलियन से अधिक मौतें 30 से 60 वर्ष की आयु के बीच होती हैं, जिनमें से ज्यादातर भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। हृदय रोग, कैंसर, श्वसन रोग, मनोभ्रंश, उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह प्रमुख रोग हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति आत्महत्या और आत्महत्या का प्रयास है, आत्महत्या न केवल उच्च आय वाले देशों में होती है, बल्कि दुनिया के सभी क्षेत्रों में एक वैश्विक घटना बन गई है। गैर संचारी या जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारणों में कार्यस्थल या घर पर प्रदूषकों के संपर्क में आना, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक एक ही स्थिति में काम करना, ईयरफोन का अनुचित उपयोग, गलत तरीके से बैठना, खराब या अस्वास्थ्यकर खाने की आदतें, आहार में पोषक तत्व और पानी, हर चीज में तनाव, कम या ज्यादा नींद आदि शामिल है।

योगाचार्य और वेलनेस मोटिवेटर रुचिता उपाध्याय का कहना है कि जीवनशैली में बदलाव, योग, आयुर्वेदिक चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, खान-पान की आदतों और बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधियों से गैर-संचारी रोगों के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। जीवनशैली की बीमारियों से दूर रहने के लिए, पौष्टिक भोजन पर ध्यान दें, मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, धूम्रपान, शराब, ड्रग्स से बचें, साथ ही बीमारियों से बचना ज्यादा बेहतर है। इलाज के बजाय यदि आप स्वास्थ्य संबंधी जीवन शैली की जानकारी प्राप्त करते हैं और उनका नियमित रूप से पालन करते हैं, तो आप कई बीमारियों से बचकर जीवन भर स्वस्थ रह सकते हैं।

रुचिता बताती हैं कि मनुष्य के स्वस्थ होने का अर्थ यह है कि उसके शरीर के सभी अंग पूर्ण और अपने-अपने कार्यों को करने में सक्षम हों, शरीर न तो बहुत स्थूल हो और न ही बहुत कमजोर हो और मन और मस्तिष्क पर पूर्ण नियंत्रण हो। स्वस्थ रहने के लिए दोनों का स्वस्थ रहना आवश्यक है। मानव-शरीर ईश्वर द्वारा निर्मित एक ऐसा जटिल तथा स्वचालित यन्त्र है, जिसमें एक ही समय में विभिन्न अङ्ग, विभिन्न कार्यों का सम्पादन करते हैं। यदि हम इस यन्त्र के रख-रखाव पर ध्यान नहीं देंगे तो क्या होगा? इसकी कार्यक्षमता व्यतीत होते हर क्षण के साथ कम होती जायगी, हमारा स्वास्थ्य हमसे छिन जायगा और शरीर रोगालय बनकर रह जायगा। अतः आवश्यक है कि हम इसे सही ढंग से कार्य करने की स्थिति में रखने के लिये प्रयत्न करें।

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