उत्तराखंड के वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी व वर्तमान में संभागीय खाद्य नियंत्रक व गन्ना आयुक्त के पद पर तैनात ललित मोहन रयाल की तीसरी पुस्तक जल्द पाठकों के बीच आने वाली है। ‘खड़क माफी की स्मृतियों से’ और ‘अथ श्री प्रयाग कथा’ पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद हिंदी साहित्य में अलग तरीके की विशिष्ट शैली की पहचान बन चुके ललित मोहन रयाल की तीसरी पुस्तक ”कारी तू कब्बि ना हारी” फरवरी महीने में पाठकों के बीच आ जाएगी जिसका कवर पेज भी आ चुका है।
लेखक ललित मोहन रयाल ने इस पुस्तक में पिता की स्मृतियों को न सिर्फ संजोया है बल्कि जीवन के संघर्ष, सेवा समर्पण और रिश्तो की बुनावट सहित कई प्रसंग बेहद सजगता के साथ लिखें है। और पाठकों को यह पुस्तक हर उस पिता की संघर्षों की कहानी का बोध कराएगा जिसे पढ़कर उन्हें यह अपनी सी लगने लगेगी। लेखक ललित मोहन रयाल की ”कारी तू कब्बि ना हारी” पुस्तक के लिए अब तक कई लोगों की समीक्षा सामने आ गई है जिस तरह कई वरिष्ठ लेखकों ने ललित मोहन रयाल की इस पुस्तक की समीक्षा की है उसे पढ़कर पाठकों को इस पुस्तक के प्रकाशित होने का बेसब्री से इंतजार है।
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