अब नदी-झरनों के पास सेल्फी लेना पड़ सकता है भारी, उत्तराखंड में बनेंगे ‘नो सेल्फी जोन’

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देहरादून। मानसून सीजन से पहले आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम), गृह मंत्रालय और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी जागरूक और सक्षम बनाना जरूरी है। उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और अधिकारियों को आपदा प्रबंधन की नई तकनीकों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें सभी विभागों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्व चेतावनी प्रणाली, बाढ़ प्रबंधन, शहरी बाढ़, जोखिम मूल्यांकन, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे, नई तकनीकों के उपयोग और आपदा के बाद नुकसान के आकलन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

इस दौरान सचिव विनोद कुमार सुमन ने नदी-नालों, झरनों, गहरी खाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर रील्स बनाने और सेल्फी लेने के बढ़ते चलन पर चिंता जताई। उन्होंने जिलों को ऐसे स्थानों की पहचान कर उन्हें “नो सेल्फी जोन” घोषित करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षित स्थानों को “सेल्फी सेफ जोन” के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया।

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यूएसडीएमए के अधिकारियों ने बताया कि मानसून को देखते हुए सभी जिलों और संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, भूस्खलन की चुनौतियों और अर्ली वार्निंग सिस्टम की उपयोगिता पर भी चर्चा की। साथ ही लोगों से सचेत ऐप, दामिनी ऐप और मौसम विभाग की सेवाओं का उपयोग करने की अपील की गई।

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