हल्दूचौड़ सीएचसी में सुविधाओं का अभाव : हाईकोर्ट सख्त -सरकार से एक माह में प्रगति रिपोर्ट तलब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्दूचौड़ में वर्ष 2014 में बनकर तैयार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अब तक स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न होने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक माह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई एक माह बाद के लिए निर्धारित की है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में कोर्ट के आदेश के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के संचालन के लिए कई पदों पर नियुक्तियां कर दी गई हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अस्पताल में अब भी कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
अदालत को बताया गया कि कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल का संचालन शुरू हुआ और कुछ पद भी भरे गए, लेकिन सीएचसी के मानकों के अनुरूप आवश्यक पद अभी तक सृजित नहीं किए गए हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नैनीताल द्वारा महानिदेशक स्वास्थ्य को पद सृजन के लिए पत्र भी भेजा गया था, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
मामले की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक माह के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, हल्दूचौड़ निवासी गोविंद बल्लभ भट्ट और सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत गौनिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हल्दूचौड़ सीएचसी का निर्माण वर्ष 2014 में करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो गया था। इसके बावजूद अस्पताल वर्ष 2014 से 2023 तक बंद पड़ा रहा, जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

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