काव्यमेरी ख्वाईश…. By दिनेश पाण्डे / March 1, 2020 चले हैं दूर तक तन्हा, कोई आवाज़ तो दे दे.. जो मेरे गम समझ सके,
काव्यगर्दिश ए वक्त की, समझो तुम चाल- By दिनेश पाण्डे / February 29, 2020 गर्दिश ए वक्त की, समझो तुम चाल,फिरकापरस्ती जुबान की, मत बनो ढाल, जल जाओगे आपस