उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्र मामला,हरिद्वार में पहला मुकदमा दर्ज।
हरिद्वार- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हरिद्वार में प्रशासन ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनने वाले प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी है। शुक्रवार से शुरू हुई जांच में एक सीएससी सेंटर संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। हरिद्वार के तहसीलदार सचिन कुमार ने ज्वालापुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। डीएम के निर्देश पर हरिद्वार जिले में यह पहला मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमे मुस्तफाबाद गांव में संचालित सीएससी सेंटर की जांच की गई। जांच में पाया गया कि सीएससी संचालक ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक ग्रामीण का स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन किया है। फर्जीवाड़ा सामने आने पर तहसीलदार की ओर से ज्वालापुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।
बता दें हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जनपद की सभी तहसीलों, नगर निगम और ग्राम पंचायतों में पिछले पांच सालों में जारी किए गए स्थाई निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आय प्रमाण जैसे सभी प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने एक विशेष टास्क फोर्स का भी गठन किया। डीएम के निर्देश पर हरिद्वार के तहसीलदार सचिन कुमार ने आज मुस्तफाबाद गांव में संचालित एक सीएससी सेंटर का निरीक्षण कर दस्तावेजों की रैंडमली जांच की। जांच के दौरान दस्तावेज में फर्जीवाड़ा कर स्थाई निवास प्रमाण पत्र का आवेदन पाया गया। फर्जीवाड़ा मिलते ही सीएससी सेंटर का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।
ज्वालापुर कोतवाली में तहसीलदार की ओर से शिकायत देकर बताया गया कि सीएससी संचालक साजिद निवासी मुस्तफाबाद ने गांव के ही नवाजिश नाम के ग्रामीण का स्थाई निवास प्रमाण पत्र का आवेदन किया था। बीती 9 नवंबर को आरोपी साजिद ने कूटरचित तरीके से नकल खतौनी में नाम बदलकर अपलोड किया. आरोपी लगातार लोगों के साथ ऑर्गेनाइज्ड तरीके से विभिन्न क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर सरकारी दस्तावेजों प्राप्त कर फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का काम कर रहा है। गैरकानूनी तरीके से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। जिसके बाद ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने आरोपी सीएससी संचालक साजिद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
डीएम मयूर दीक्षित ने खासकर स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर आज से कार्रवाई भी शुरू हो गई है। तहसीलदार सचिन कुमार ने बताया फर्जी प्रमाण पत्रों की वजह से पात्र लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। इससे राजस्व के नुकसान होने की संभावना होती है, साथ ही सभी सीएससी सेंटरों की जांच के निर्देश भी दिये गये हैं।
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