देहरादून- उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में तैनात 109 डॉक्टर पिछले 3 साल से लापता है। यह डॉक्टर ने तो अपने कार्यस्थल पर जा रहे हैं, न हीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे जा रहे नोटिसो का जवाब दे रहे हैं। इसी में इन डॉक्टरों को हटाने की तैयारी चल रही है।
दरअसल स्वास्थ्य विभाग में लोक सेवा आयोग के जरिए डॉक्टरों की नियुक्ति होती है। जिसके बाद डॉक्टरों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में जरूरत के मुताबिक नियुक्ति दी जाती है। लेकिन प्रदेश के कई अस्पतालों में पिछले कुछ वर्षों से एक सुनो डॉक्टरों की नियुक्ति के बाद से कुछ अता पता नहीं है। कई डॉक्टर तो 5 साल से अनुपस्थित बताए गए हैं ऐसे में मुख्यालय ने सीएमओ से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी जिसके बाद इन सभी अनुपस्थिति डॉक्टरों से पत्राचार किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। लिहाजा ऐसे में विभाग इन्हें नौकरी से हटाने का निर्णय ले चुका है। और उसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह भी बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में एमबीबीएस डॉक्टर पीजी की तैयारी करते हैं। और जो एंट्रेंस निकाल देते हैं उन्हें पीजी करने दोबारा मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने आधी तनख्वाह देता है। यहां हैरानी की बात यह है कि कई पीजी करने के डॉक्टर भी लापता बताए गए हैं।

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