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हल्द्वानी- लालकुआं, रामनगर और कालाढूंगी में यहां फस गया पेंच, टेंशन में दावेदार और समर्थक

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हल्द्वानी- कांग्रेस पार्टी नैनीताल जनपद की तीन एवं सल्ट सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकी है। इनमें से रामनगर और सल्ट सीट पर पूर्व सीएम हरीश रावत व कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत के बीच मनमुटाव बड़ा पेच है। लालकुआं व कालाढूंगी में भी पार्टी को बगावत की आशंका है।

सबसे पहले आम आदमी पार्टी और फिर भाजपा ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी थी। भाजपा ने अभी लालकुआं विधानसभा में प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। 21 जनवरी से नामांकन शुरू होने के बाद दावेदारों के साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भी बैचेनी बढ़ रही थी। फिर भी नैनीताल जिले की लालकुआं, कालाढूंगी व रामनगर तथा अल्मोड़ा की सल्ट सीट पर निर्णय नहीं हो सका। कालाढूंगी में भाजपा से कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत को प्रत्याशी हैं।

इस सीट पर दो बार कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी भाग्य आजमा चुके हैं, मगर दोनों बार उन्हें हार मिली। तब कांग्रेसी रहे महेश शर्मा ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। अब फिर महेश शर्मा समेत पूर्व ब्लाक प्रमुख भोला दत्त भट्ट और यूसीडीएफ के पूर्व चेयरमैन संजय किरौला समेत कई इसी सीट से दावेदार हैं।

वहीं लालकुआं सीट पर पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल के अलावा हरेन्द्र बोरा, संध्या डालाकोटी, बीना जोशी और राजेंद्र खनवाल की प्रबल दोवदारी है। 2017 में कांग्रेस ने दुर्गापाल को टिकट दिया तो बोरा ने निर्दलीय लड़कर दमखम दिखाने का प्रयास किया। हालांकि जीत भाजपा के नवीन दुम्का को मिली। कुछ रावत समर्थक चाहते हैं कि हरीश रावत लालकुआं सीट से चुनाव लड़े, यह सीट उनके लिए अधिक आसान साबित हो सकती है। इसे लेकर भी पार्टी हाईकमान में मंथन चलने की बात कही जा रही है।

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रामनगर और उससे लगी अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा क्षेत्र में कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत का दखल है। वह पूर्व सीएम हरीश रावत के विरोधी खेमे के हैं। वह दोनों जगह से अपना प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं और खुद भी प्रबल दावेदार हैं। रामनगर की सीट पर हरदा समर्थक संजय नेगी, पुष्कर दुर्गापाल और आशा बिष्ट ने भी ताल ठोंकी है। खुद हरीश रावत के इस सीट पर लडऩे को लेकर भी चर्चा हुई थी। इस विषम स्थिति ने पार्टी नेतृत्व को असहज किया है। इसलिए इन दोनों सीटों पर भी बात अटकी हुई है। पार्टी नेतृत्व को यह भी डर सता रहा है कि आपसी मनमुटाव के चलते यदि जिताऊ प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया तो कांग्रेस को यह सीटें गंवानी पड़ सकती है, इसीलिए पार्टी हाईकमान फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है, साथ ही उत्तराखंड चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत भी पल-पल की कार्यकर्ताओं से अपडेट ले रहे हैं।

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