हल्द्वानी : सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी ऐसे जाने भूत, वर्तमान, भविष्य

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Signature Astrology | Handwriting Astrology | Signature Analysis | Planets in Signature | Astrology Research : ज्योतिष शास्त्र की दुनिया जितनी गहरी है उतनी ही विस्तृत भी। समय-समय पर हुए शोधों ने इसे नई दिशा दी है। इसी कड़ी में एक अनोखी विधा सामने आई है Signature Astrology (हस्ताक्षर ज्योतिष) जो व्यक्ति के हस्ताक्षर के माध्यम से उसके जीवन के रहस्यों को समझने का दावा करती है। सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी में हस्तरेखा या पूरी लिखावट नहीं…बल्कि केवल हस्ताक्षर (Signature) का अध्ययन किया जाता है। इस पद्धति में माना जाता है कि व्यक्ति के सिग्नेचर में उसके व्यक्तित्व, ग्रहों की स्थिति और जीवन की दिशा छिपी होती है। इस विधा की खोज का श्रेय Vivek Tripathi को दिया जाता है…जिन्हें Father of Signature Astrology कहा जाता है। यह पद्धति नौ ग्रहों पर आधारित है और दावा करती है कि इसके जरिए व्यक्ति के भूत, वर्तमान और भविष्य का विश्लेषण किया जा सकता है।ग्रहों से संबंध कैसे जुड़ता है?

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सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार हस्ताक्षर में बनने वाले चिन्ह और आकृतियाँ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं।कुछ प्रमुख संकेत:डॉट्स (बिंदु) – शनि ग्रह का प्रभावअंडरलाइन – मंगल ग्रह (ऊर्जा और आक्रामकता)ऊपर की ओर बढ़ता सिग्नेचर – सफलता और महत्वाकांक्षानीचे की ओर झुकाव – मानसिक अस्थिरताइसमें कई विशेष टर्म भी विकसित किए गए हैं जैसे:मनी बैगमनी बाउलमनी फ्लैगमनी ट्रायंगलवीनस लाइन, सन लाइन, मरकरी लाइनइनसे यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति के जीवन में धन, प्रेम, करियर और सफलता कैसे प्रभावित होंगे।सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी में वैज्ञानिक संकेतइस विधा को आसान बनाने के लिए इसमें कई सिंबल और पैटर्न जोड़े गए हैं।दावा किया जाता है कि…..इसे सीखना अपेक्षाकृत सरल हैआम व्यक्ति भी सिग्नेचर देखकर विश्लेषण कर सकता हैयह पारंपरिक वैदिक या नाड़ी ज्योतिष जितनी जटिल नहीं हैसिग्नेचर के विशेष संकेत और उनके अर्थ1. डॉट्स (Dots)यदि सिग्नेचर में डॉट्स का प्रयोग होता है:शनि ग्रह सक्रिय होता हैमेहनत और संघर्ष बढ़ता हैदेर से सफलता मिलती हैलेकिन प्रसिद्धि भी मिल सकती है2. मंगल रेखा (Underline)सिग्नेचर के नीचे लाइन खींचना:ऊर्जा, आत्मविश्वास और आक्रामकता का संकेतयह मंगल ग्रह से जुड़ा होता है3. सिग्नेचर का कटनाबार-बार कटना या पहला अक्षर कटनाजीवन में संघर्ष और बाधाओं का संकेतदुर्घटना की संभावना से भी जोड़ा जाता है4. सर्किल में पहला अक्षरव्यक्ति अंतर्मुखी हो सकता हैधन टिकने में कठिनाईखर्च अधिक, बचत कम5. नीचे की ओर सिग्नेचरमानसिक तनाव और अस्थिरताआत्मविश्वास की कमीइतिहास में उदाहरण के तौर पर एडोल्फ हिटलर का उल्लेख किया जाता है6. 45 डिग्री का सिग्नेचरवैवाहिक जीवन में तनावरिश्तों में अविश्वासतलाक तक की स्थिति बन सकती हैसिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी के अनुसार:जीवन से मृत्यु तक का विश्लेषण संभव बताया जाता है कुंडली या हस्तरेखा की तरह भविष्यवाणी की जा सकती है हालांकि यह अभी भी शोध और बहस का विषय है और इसे पूर्ण वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता।सिग्नेचर सुधार के सुझावयदि आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं…..सिग्नेचर साफ और स्पष्ट रखेंअनावश्यक कट या टूटन से बचेंऊपर की ओर बढ़ता हुआ सिग्नेचर रखेंअत्यधिक डॉट्स या उलझन वाले चिन्ह न बनाएंसिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी ज्योतिष की एक नई और रोचक शाखा है, जो व्यक्ति के हस्ताक्षर को उसके जीवन से जोड़ने का प्रयास करती है। यह विधा सरल जरूर है…लेकिन इसकी सटीकता और वैज्ञानिकता पर अभी भी चर्चा जारी है। फिर भी यह कहना गलत नहीं होगा कि आपका सिग्नेचर सिर्फ एक पहचान नहीं…बल्कि आपकी मानसिकता और व्यक्तित्व का आईना भी हो सकता है।

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