नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड बार काउंसिल के 10 निर्वाचित सदस्यों की याचिका पर केंद्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है…कि बार काउंसिल के चुनाव पूरे होने और परिणाम घोषित होने के बाद BCI ने परिषद के सदस्यों की संख्या बदलने का फैसला लिया…जो नियमों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले को सुनते हुए केंद्र सरकार और BCI को नोटिस जारी किया है।
याचिका के अनुसार, उत्तराखंड बार काउंसिल के चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी समिति की देखरेख में हुए थे। चुनाव परिणाम 28 फरवरी को घोषित हुए और 13 मार्च को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किए गए…जिससे निर्वाचित सदस्यों का पद वैध हो गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अनुसार 10,000 से अधिक वकीलों वाले राज्य में अधिकतम 25 निर्वाचित सदस्य हो सकते हैं। लेकिन बाद में BCI ने एक प्रस्ताव लाकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए यह संख्या 32 तक करने की बात कही।
याचिका में दावा किया गया है कि संसद में कानून बदले बिना ऐसा फैसला लेना कानूनी अधिकार से बाहर है साथ ही…पहले से घोषित चुनाव परिणामों में बदलाव करना पूरी चुनाव प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने जैसा है।
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में केंद्र सरकार और BCI का पक्ष सुनने के बाद आगे की सुनवाई करेगा।

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