उत्तराखंड की राजनीति में परिपक्व नेतृत्व की मिसाल बने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
देहरादून उत्तराखंड में बीते पंद्रह दिनों के घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ऐसे नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित कर दिया है, जो न केवल परिपक्व और संवेदनशील हैं, बल्कि पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक भी दिखाई देते हैं।
दरअसल चार वर्ष पूर्व जब पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में कई सवाल खड़े हुए थे। मुख्यमंत्री बदलने की परंपरा वाले इस राज्य में राजनीतिक पंडितों को यही लगता था कि यह केवल एक चेहरा परिवर्तन है। यह आशंका जताई जा रही थी कि क्या एक युवा नेता इतने संवेदनशील राज्य की बागडोर संभाल पाएगा?
लेकिन समय ने इन सभी शंकाओं को गलत साबित कर दिया। आज वही पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में साहसिक और निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता दिखाई है। उनकी कार्यशैली ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्याय के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे इसके लिए राजनीतिक जोखिम ही क्यों न उठाने पड़ें।
हालिया घटनाक्रम के दौरान कई बड़े नाम सामने आए, कई प्रभावशाली नेताओं पर सवाल उठे, लेकिन इन सबके बीच मुख्यमंत्री धामी का नाम किसी भी विवाद से पूरी तरह अछूता रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी वर्षों से बनी साफ-सुथरी और पारदर्शी छवि है, जिसे उन्होंने इतने मजबूत आधार पर स्थापित किया है कि विरोधियों के लिए उसे धूमिल करना आसान नहीं है।
अब जबकि मामले की सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, उम्मीद की जा रही है कि सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी और बहन अंकिता को पूर्ण न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अब तक का रुख यह दर्शाता है कि राज्य में कानून और न्याय सर्वोपरि है।
उत्तराखंड की राजनीति में यह दौर एक ऐसे नेतृत्व को रेखांकित कर रहा है, जो दबाव में नहीं झुकता, बल्कि फैसलों से इतिहास लिखता है।

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