
वो जो देखा था हमने एक सपना… कि कैसा होगा अलग प्रदेश अपना…
वो जो देखा था हमने एक सपना…कि कैसा होगा अलग प्रदेश अपना…वो सपना रोज़ टूटता

वो जो देखा था हमने एक सपना…कि कैसा होगा अलग प्रदेश अपना…वो सपना रोज़ टूटता

सबै वैक्सीन जरूर लगाया,कोराना कैं मिलबेर भगाया।…..अठारह उमर हौली या पैंतालीस पारा,गौं गौनूंमें टीका केन्द्र

मेघ उमड़ रहे है नील गगन में काले काले…बरस पड़ो अब धरा पे रिम झिम

बरामदे ;कितने जरूरी है ?घर में ,बरामदे!जो बंद और तंग नही होते ,खुली दुनिया दिखाते

नैनीताल की तन्हाई,कोरोनो संग आई,इस खुशनुमा मौसम में ये कैसी मायूसी छाई,रोनक रहती थी यहां


अपनी गायकी के दम पर लगातार एक से बढ़कर एक परफॉर्मेंस देने वाले उत्तराखंड के

हल्द्वानी- लोकगायक व शिक्षक स्वर्गीय श्री पंचम मेवाड़ी जी की पहली पुण्यतिथि पर उनका लिखा

जय देवभूमिदेवों की तपोभूमि,उत्तराखण्ड जै जयकार।बरकत सबूकैं ऐजो,खुशहाली सबूकैं द्वार।चार धामों किं पावनता,जय गंगे जय