
(बाल कविता) मेरी मित्र परछाई , क्या है तुम्हारी सच्चाई
मेरी मित्र! परछाई मेरी मित्र परछाई , क्या है तुम्हारी सच्चाईछोड़ती कभी न साथ, न

मेरी मित्र! परछाई मेरी मित्र परछाई , क्या है तुम्हारी सच्चाईछोड़ती कभी न साथ, न

पंतनगर – पंतनगर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अखिल भारतीय श्री नंदलाल गादिया स्मृति डिबेट में

जागेश्वर :जागेश्वर धाम में तीर्थ पुरोहित सेवा समिति के तत्वाधान में ब्रह्मकुंड के आस पास

“सीमा सड़क संगठन दिवस विशेष” विभिन्न संगठनों की श्रृंखला में कार्यरत एक सम्माननीय विभाग। 1960

Rishikesh News: कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर बीच सड़क पर एक व्यक्ति ने की गाली

हल्द्वानी के कवि श्री हिमांशु पाठक का साधना टीवी में काव्य पाठ । हल्द्वानी के

आने दो विभीषण को,उनसे बात करते है,तुम्हारी,बात भी मानेंगे,पहले,उनको सुनते है,मेरी शरण मे आया है,उनको,ठुकरा

जय जय शंभू महादेवा, धरिया हामरि लाज,विनती सुणीया हे देवा, सुफल करिया काज। एक हाथ

वो जो देखा था हमने एक सपना…कि कैसा होगा अलग प्रदेश अपना…वो सपना रोज़ टूटता