नैनीताल में आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने परखी तैयारियां

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नैनीताल: मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गुरुवार को नैनीताल जिले में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हुई इस अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य, अग्निशमन, लोक निर्माण, विद्युत, जल संस्थान और अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।

मॉक ड्रिल के तहत जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर बाढ़, तेज बहाव, भूस्खलन और लोगों के फंसने जैसी काल्पनिक परिस्थितियां बनाई गईं। सभी विभागों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर आपदा से निपटने की अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया।

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जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिला आपदा परिचालन केंद्र से नैनीताल फ्लैट मैदान, गौलापार अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, बेतालघाट की काली पहाड़ी, कालाढूंगी के निहाल नाले और लालकुआं के बिंदुखत्ता क्षेत्र में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मॉक ड्रिल की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत भी इस समीक्षा बैठक से जुड़े।

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गौलापार में आयोजित अभ्यास के दौरान गौला नदी में 20 से 25 लोगों के फंसे होने की काल्पनिक सूचना पर एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य टीमों ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजने का अभ्यास भी किया गया।

इसी तरह लालकुआं, कालाढूंगी और बेतालघाट क्षेत्रों में भी अलग-अलग आपदा परिदृश्यों के आधार पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। अभ्यास के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए।

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जिलाधिकारी ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, संसाधनों की तैयारियों का आकलन करना और वास्तविक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना है।

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