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उत्तराखंड के 17 राजकीय कॉलेजों को मिले स्थाई मुखिया

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देहरादून: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित डेढ़ दर्जन राजकीय महाविद्यालयों को आखिरकार स्थाई प्राचार्य मिल गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुमोदन के बाद शासन ने पदोन्नत प्राचार्यों को उनके नवीन तैनाती स्थलों पर भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।

सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी….बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इससे छात्रों को बेहतर शिक्षा माहौल और सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

राज्य सरकार द्वारा लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे कि प्रत्येक महाविद्यालय में स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए…ताकि महाविद्यालय राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग और नैक मूल्यांकन में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इसी दिशा में यह कदम एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

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डॉ. धन सिंह रावत के अनुमोदन के बाद शासन ने प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर कार्यरत 17 शिक्षकों को स्नातक प्राचार्य के पद पर पदोन्नति प्रदान की है। इनमें प्रीति त्रिवेदी (पतलोट, नैनीताल), सुरेश चन्द्र मंमगाई (पौखाल, टिहरी गढ़वाल), डॉ. शैराज अहमद (तलवाड़ी, चमोली), डी.एन. तिवारी (गरुड़, बागेश्वर), डॉ. बचीराम पंत (मंगलौर, हरिद्वार), प्रणीता नंद (नरेन्द्रनगर, टिहरी), डॉ. मृत्युंजय कुमार शर्मा (त्यूणी, देहरादून), डॉ. सीमा चौधरी (गरूड़ाबांज, अल्मोड़ा), पुष्कर सिंह बिष्ट (जसपुर, ऊधमसिंह नगर), जयचन्द्र कुमार (काण्डा, बागेश्वर), डॉ. अरविंद सिंह (उफरैंखाल, पौड़ी), डॉ. मुकेश कुमार (नैनबाग, टिहरी), डॉ. राधेश्याम गंगवार (थत्यूड़, टिहरी), डॉ. कमरूद्दीन (लमगड़ा, अल्मोड़ा), डॉ. कल्पनाथ सिंह यादव (नैनीडांडा, पौड़ी), डॉ. विद्या शंकर शर्मा (घाट, चमोली), डॉ. हरीश चन्द्र (कण्वघाटी, कोटद्वार) और डॉ. नर्वदेश्वर शुक्ल (देवप्रयाग, टिहरी गढ़वाल) के नाम शामिल हैं।

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इन सभी प्राचार्यों को एक सप्ताह के भीतर अपने नए कार्यस्थल पर योगदान देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने की स्थिति में शासन फोरगो नियमावली के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगा।

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उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और गुणवत्तापरक बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। प्राचार्यों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। डेढ़ दर्जन महाविद्यालयों में स्थाई प्राचार्य की तैनाती से न केवल प्रशासनिक गति बढ़ेगी बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार होगा।।

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