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उत्तराखंड- विदेशों में अच्छी नौकरी के बावजूद, अब अपने पहाड़ में मशरूम की खेती कर ऐसे प्रेरणा बना रावत दम्पति

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Ramnagar News- कहते हैं कि परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता और कुछ नया करने की सोच हमेशा सकारात्मक परिणाम लेकर आती है। ऐसा ही कुछ 15 साल तक विदेशों में काम करने वाले एक दंपत्ति ने कर दिखाया है लॉकडाउन के दौरान विदेश में नौकरी छोड़ घर लौट कर आए एक दंपत्ति ने स्टार्टअप शुरू किया और अब वह लोगों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। आइए जानते हैं उनकी कहानी..

15 साल तक ओमान, कुवैत और दुबई जैसे देशों में लाइफस्टाइल ब्रांड के ऑपरेशंस मैनेजर के बतौर काम करने वाले सतिंदर सिंह रावत ने इस बार पहाड़ लौटकर फिर से मशरूम की खेती कर नया स्टार्टअप शुरू किया और अब वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। आज अपने स्टार्ट अप से 70 हजार किलो मशरूम प्रतिवर्ष उगाने का लक्ष्य रखने वाले सतिंदर का संघर्ष भी कुछ कम नही है।

15 साल तक खाड़ी देशों में काम करने के बाद लॉकडाउन में जॉब चली जाने के बाद जून 2020 में वह अपने परिवार के साथ नोएडा आ गए, वहां अपने परिवार के साथ उन्होंने अपने भविष्य के प्रति चिंता जाहिर की तो ऐसे समय में उनकी पत्नी सपना और ससुर डॉक्टर जेपी शर्मा ने उनका हौसला बढ़ाया। हिमाचल प्रदेश में डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर पद से सेवानिवृत्त हुए ससुर ने उन्हें बटन मशरूम की खेती का सुझाव दिया।

मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल ब्लॉक के पट्टी खाटली के रहने वाले सतिंदर ने अपने गांव जाकर बंजर जमीन में देखा तो उन्हें वहां खेती का विचार आया लेकिन वहां जंगली जानवरों का खतरा देख उन्होंने रामनगर के पास भवानीपुर में पंजाबी गांव में अपनी दूसरी जमीन पर साढे सात बीघा में मशरूम की खेती शुरू की। उन्होंने बटन मशरूम की खेती को बेहतर तरीके से करने के लिए एक युवा को दिल्ली से हायर किया और 10 स्थानीय लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया।

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अपने स्टार्टअप से आत्मनिर्भर भारत पर काम करते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में मशरूम की खेती को नई पहचान दिलाई, यही नहीं पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन और कृषि में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के इस दृष्टिकोण से रावत दंपत्ति ने अब अपने इस बटन मशरूम के कारोबार को बढ़ाने के लिए 70 हजार किलो मशरूम उगाने का लक्ष्य रखा है। सतिंदर रावत उन सभी युवाओं के लिए अब प्रेरणा हैं जो छोटे स्केल में स्वरोजगार करना चाहते हैं। क्योंकि लगन और मेहनत से सब कुछ संभव है इसीलिए वह अपने पहाड़ की बीरोंखाल की जमीन पर भी मशरूम की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।

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