देहरादून: हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में उत्तराखंड में प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में भाग लिया और समान नागरिक संहिता (UCC) को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले कर्मचारियों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह दिन राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा क्योंकि इसी दिन उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हुई। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता से समाज में समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति के आदर्श और भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को भी उद्धृत करते हुए कहा कि समरसता और समानता सदियों से हमारे समाज की पहचान रही है।
धामी ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 में शामिल किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज की कुप्रथाओं को दूर कर सभी नागरिकों में समानता स्थापित करने का प्रयास है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद राज्य की मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून महिलाओं के सशक्तिकरण का नया युग लेकर आया है और राज्य में कोई भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया।
समरसता और समान अधिकार सुनिश्चित
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी में सभी धर्मों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार और संपत्ति वितरण से संबंधित नियम एक समान किए गए हैं। बच्चों को समान अधिकार मिलते हैं और किसी की मृत्यु होने पर संपत्ति में सभी परिवारिक सदस्य समान हिस्सेदारी पाएंगे। लिव-इन संबंधों में भी पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, और जन्मे बच्चों को जैविक संतान के समान अधिकार दिए गए हैं। यह जानकारी माता-पिता या अभिभावक को केवल गोपनीय रूप में दी जाती है।
प्रभावी क्रियान्वयन और रिकॉर्ड संख्या
धामी ने कहा कि यूसीसी को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि प्रभावी रूप से लागू किया गया। बीते वर्ष में राज्य में विवाह पंजीकरण की संख्या प्रतिदिन औसतन 1400 तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह संख्या केवल 67 थी। लगभग 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में सभी विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक किया गया। यूसीसी के तहत अब तक लगभग 5 लाख आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया गया।
कठोर कानून और सुरक्षा उपाय
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में यूसीसी में आवश्यक संशोधन किए गए हैं जिससे विवाह या लिव-इन संबंधों में पहचान छुपाने, दबाव, धोखाधड़ी या अन्य अवैध कार्यों पर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू किए गए हैं। धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी को मूल निवासी बनाने या किसी धर्म को बदलने का माध्यम नहीं है। यह कानून बहनों और बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करता है।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संहिता देश में समानता और न्याय के मार्ग में मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निर्णय लेने की क्षमता से देश में एकता और समरसता कायम होती है। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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