देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद राज्य में नई अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था लागू हो गई है। अब प्रदेश के सभी मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संचालन के लिए शिक्षा विभाग से मान्यता लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण काम शुरू कर चुका है।
प्रदेश में कुल 452 पंजीकृत मदरसे हैं, लेकिन अब तक केवल 158 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों की शिक्षा विभाग के तय मानकों के अनुसार जांच की जाएगी। जो संस्थान सभी मानकों को पूरा करेंगे…उन्हें मान्यता दी जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए। इनमें सात मदरसे, एक सिख समुदाय का स्कूल और एक जैन समुदाय का शिक्षण संस्थान शामिल है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि 30 जून 2026 से मदरसा बोर्ड की व्यवस्था समाप्त हो गई है और 1 जुलाई से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण प्रभावी हो गया है। अब सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता इसी नई व्यवस्था के तहत दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग की टीम सभी आवेदनों का भौतिक सत्यापन करेगी। जिन संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं और निर्धारित मानक पूरे नहीं मिलेंगे…उन्हें सुधार के लिए निश्चित समय दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी मानकों का पालन नहीं किया गया तो उन्हें मान्यता नहीं मिलेगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए पारदर्शी और एक समान मान्यता प्रणाली लागू करना है। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी शुरू किया गया है…ताकि मदरसे और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आसानी से आवेदन कर सकें। सरकार का कहना है कि अब केवल वही संस्थान संचालित हो सकेंगे…जो शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे।
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