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जै वीणावादनी (कुमांउनी दोहे)

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हाथ जोड़ी विनय करूँ, धरिये माता लाज। मिटै दिये अन्यार कैं,   द्वार ऐ रयूँ आज।।
जब जब वीणा बाजछौ, फैल जाँछ तब ज्ञान।उज्याव दुणि में फैलछौ, मिट जाँछ सब अज्ञान।।
नाम जपनि माँ शारदे,  वाणि में छौ निवास ।साँच मन लै जैंल भजो, पुर हूँछौ सब आश।।
जय हे वीणापाणि माँ,  तिकैं भजूँ संसार।भरिं दिये माता सदा,   आब ज्ञान भंडार।।
सदा हाथ वीणा सजीं, बाजी जब झंकार।ज्ञान उनूँ कैं मिल जछौ, जो आयीं दरबार।।
ज्ञान देवी त्यौर करूँ, सदा सदा जयकार।भल बाट लें दिखैं दिये, भरिये ज्ञान भकार।। 
विद्या देवी भजूँ तिकैं, हंस सवारी नाम। माता चरणों में त्यौर, दुणिं कौ ज्ञान धाम ।।
रोग  दोष  दूर  करिये,   दुणि  हैजो खुशहाल। भौल बुलाणक मति एजो,कटि जो सब जंजाल।। 
हर घर ज्ञानक दिप जलो, मिटी जो सब अन्यार। भलि मति हामूँकैं दिये,  सुण छै सदा पुकार।।
विद्या धन ठुल छूँ दुणि में, भरि ल्यो यैं भंडार।माँ त्यौर शरण ऐ रयूँ ,  करि  दै  वेणा  पार।।

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