हरिद्वार: अर्धकुंभ-2027 से पहले दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। सहारनपुर से हरिद्वार को जोड़ने वाले 51 किलोमीटर लंबे स्पर-टू कॉरिडोर का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना का 95 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य पूरा होने के बाद दिसंबर से इस मार्ग को यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
नया कॉरिडोर शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से हरिद्वार आने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। इससे खासतौर पर अर्धकुंभ के दौरान बढ़ने वाले यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर छह लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड मार्ग है। यह सहारनपुर के हलगोया मुस्तकम से शुरू होकर भगवानपुर, सालियर और कलियर होते हुए भड़ेड़ी राजपूताना के पास बहादराबाद क्षेत्र में मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-58 से जुड़ता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मुताबिक, इस परियोजना का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। बहादराबाद टोल प्लाजा के पास एक छोटे हिस्से में काम बाकी है। इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना के दिसंबर में यातायात के लिए खुलने का लक्ष्य है।
नए कॉरिडोर के चालू होने से दिल्ली और हरिद्वार के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस मार्ग से दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार पहुंचने में करीब ढाई घंटे लग सकते हैं। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय शुरुआती स्थान, यातायात और सड़क की स्थिति पर निर्भर करेगा।
दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ने वाला यह मार्ग हरिद्वार आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यात्रियों को मौजूदा रास्तों के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
हरिद्वार में अर्धकुंभ-2027 के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा साल भर होने वाले स्नान पर्वों पर भी दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार आते हैं।
ऐसे में नए कॉरिडोर के शुरू होने से वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। इससे प्रमुख सड़कों पर दबाव कम करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
कॉरिडोर का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। हरिद्वार के होटल, धर्मशालाओं, परिवहन सेवाओं, खानपान और स्थानीय बाजारों से जुड़े कारोबारियों को भी इसका फायदा मिलने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआर से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा आसान होने पर हरिद्वार में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इसके साथ ही सिडकुल क्षेत्र में मालवाहक वाहनों और स्थानीय लोगों के आवागमन को भी बेहतर यातायात प्रबंधन से सुविधा मिल सकती है।
एनएचएआई की रुड़की परियोजना से जुड़े अधिशासी अभियंता अतुल शर्मा ने बताया कि स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का 95 प्रतिशत से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है। बाकी काम तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लक्ष्य है कि दिसंबर में इस मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया जाए।
यदि परियोजना तय समय पर शुरू हो जाती है…याLतो अर्धकुंभ से पहले दिल्ली और हरिद्वार के बीच सड़क संपर्क को मजबूती मिल सकती है। इससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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