CM धामी को शिवराज सिंह चौहान का पत्र, उत्तराखंड में 15 वाटरशेड परियोजनाओं पर बढ़ेगी रफ्तार

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देहरादून : उत्तराखंड में जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की तैयारी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक यानी WDC-PMKSY 2.0 के तहत राज्य में स्वीकृत परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर इन परियोजनाओं को तय समय में पूरा कराने और केंद्र से मिली धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। केंद्र का जोर खास तौर पर जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी की नमी बनाए रखने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने वाले कार्यों पर है।

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15 परियोजनाओं से 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ

केंद्र की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तराखंड में WDC-PMKSY 2.0 के तहत 15 वाटरशेड परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

इन सभी परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 232.26 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 209.03 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य को अब तक करीब 113.48 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है।

सितंबर तक पूरा करना होगा बचा हुआ काम

इन परियोजनाओं की मूल अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, कई काम अभी बाकी हैं। ऐसे कार्यों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने परियोजनाओं की अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है।

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केंद्र का मानना है कि यह अतिरिक्त समय बची हुई प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन गतिविधियों को पूरा करने और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य स्तर पर संबंधित विभागों और अधिकारियों को इन कार्यों में तेजी लाने की जरूरत होगी।

उत्तराखंड के लिए 31.58 करोड़ रुपये की सहायता

चालू वित्तीय वर्ष में भी उत्तराखंड के लिए WDC-PMKSY 2.0 के तहत 31.58 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता निर्धारित की गई है। इसमें से 15.79 करोड़ रुपये की राशि परियोजनाओं के सुचारू संचालन के लिए मदर सैंक्शन के रूप में जारी की जा चुकी है।

केंद्र सरकार चाहती है कि पहले से उपलब्ध राशि का समय पर और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल हो, जिससे परियोजनाओं का काम जमीन पर दिखाई दे सके।

बारिश के पानी को रोकने पर रहेगा जोर

मानसून के दौरान मिलने वाली बारिश को जल संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से केंद्र ने वाटरशेड परियोजनाओं के तहत वर्षा जल को अधिक से अधिक संरक्षित करने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है।

इनमें चेक डैम, फार्म पॉण्ड, खेत तालाब, परकोलेशन टैंक और दूसरी जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट, मृदा संरक्षण और मिट्टी में नमी बनाए रखने से जुड़े कार्यों पर भी तेजी से काम करने को कहा गया है।

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इन उपायों का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकना, उसे जमीन में पहुंचाना और जरूरत के समय ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाना है। इससे खेती और ग्रामीण आजीविका को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

भूजल रिचार्ज और सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर भी फोकस

वाटरशेड परियोजनाओं का एक अहम उद्देश्य भूजल पुनर्भरण भी है। बारिश के पानी को संरक्षित करने वाली संरचनाओं के जरिए पानी को जमीन में पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे भविष्य में जल स्रोतों और भूजल पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा सूखे की स्थिति से निपटने के लिए मृदा नमी संरक्षण और अन्य सूखा-रोधी उपायों को भी परियोजनाओं में प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

आगे मिलने वाली केंद्रीय सहायता भी प्रदर्शन से जुड़ी

केंद्र सरकार ने परियोजनाओं की प्रगति को भविष्य की सहायता से भी जोड़ा है। WDC-PMKSY 2.0 के तहत स्वीकृत काम कितनी तेजी से पूरे होते हैं, केंद्रीय राशि का कितना प्रभावी इस्तेमाल होता है और परियोजनाओं की प्रगति निर्धारित समय के अनुसार रहती है, इन सभी पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाएगा।

इसी प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में WDC-PMKSY 3.0 के तहत परियोजनाओं के आवंटन में भी राज्य की स्थिति प्रभावित हो सकती है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्यों के बीच केंद्रीय सहायता के पुनः आवंटन में भी काम की प्रगति और उपलब्ध राशि के उपयोग को आधार बनाया जा सकता है।

तेजी से काम करने वाले राज्यों को अतिरिक्त सहायता में प्राथमिकता

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केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो राज्य स्वीकृत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएंगे और उपलब्ध धनराशि का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करेंगे, उन्हें अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के आवंटन में प्राथमिकता दिए जाने पर विचार किया जा सकता है।

उत्तराखंड के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में पहाड़ी क्षेत्रों, जलस्रोतों और ग्रामीण इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण की जरूरत लगातार बनी रहती है।

राज्य को हरसंभव सहयोग का भरोसा

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री से राज्य के संबंधित विभागों और क्षेत्रीय अधिकारियों-कर्मचारियों को बचे हुए वाटरशेड कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है।

केंद्र के भूमि संसाधन विभाग की ओर से उत्तराखंड सरकार को योजना के क्रियान्वयन में आवश्यक सहयोग और सहायता देने का भरोसा भी दिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के तहत राज्य को मिल रहे सहयोग के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताया है।

अब राज्य सरकार के सामने 30 सितंबर 2026 तक बची हुई परियोजनाओं को पूरा करने और मानसून के दौरान जल संरक्षण से जुड़े कामों को अधिक गति देने की चुनौती है। यदि इन परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कार्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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