कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 93% तक घटी कीमतें, जानिए कब से मिलेगा फायदा

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नई दिल्ली: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमतें घटने जा रही हैं। केंद्र सरकार की दवा मूल्य नियामक संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 543 ब्रांड की एंटी-कैंसर दवाओं की नई अधिकतम खुदरा कीमतें जारी की हैं। संशोधित दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। कुछ दवाओं की कीमतों में 93 फीसदी से अधिक की कमी की गई है। इससे संबंधित दवाएं इस्तेमाल करने वाले मरीजों को इलाज के खर्च में राहत मिल सकती है।

सरकार ने यह कदम कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया है। इसके तहत 137 चिन्हित नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद दवा की सप्लाई चेन में अतिरिक्त मार्जिन को कम करना है, ताकि मरीजों को दवाएं पहले के मुकाबले कम कीमत पर मिल सकें।

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नई कीमतों में बदलाव के कुछ उदाहरण काफी अहम हैं। एनास्ट्रोजोल 1 एमजी टैबलेट के एनार्ज़ोल ब्रांड के 10 टैबलेट वाले पैक की कीमत पहले 695.76 रुपये थी। अब यह 73 रुपये में उपलब्ध होगा।

इसी तरह एजासिटिडाइन इंजेक्शन की कीमत 6,337 रुपये से घटाकर 1,495.04 रुपये कर दी गई है। बेवासिजैब इंजेक्शन की 4 एमएल शीशी अब 21,767.70 रुपये के बजाय 5,930.13 रुपये में मिलेगी।

दूसरी ओर, दसनत 20 एमजी टैबलेट की कीमत 2,812.50 रुपये से घटकर 1,085.93 रुपये हो गई है। फुलब्रेका इंजेक्शन की कीमत भी 26,072.16 रुपये से कम करके 5,491 रुपये कर दी गई है।

इन उदाहरणों से पता चलता है कि कुछ दवाओं की कीमतों में काफी कमी की गई है। हालांकि मरीजों को मिलने वाली वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि वे किस कंपनी का कौन-सा ब्रांड और पैक खरीदते हैं।

NPPA की ओर से जारी सूची में कई तरह के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, कोलन, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर के इलाज की दवाओं के साथ कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी शामिल हैं।

संशोधित कीमतों की सूची दवा कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। नियामक संस्था ने यह भी कहा है कि कंपनियों से आगे जानकारी मिलने पर सूची में नए बदलाव किए जा सकते हैं।

सरकार ने 17 अक्टूबर को घोषित नीति के तहत 137 चिन्हित नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया था। इसका उद्देश्य दवा के वितरण और खुदरा बिक्री के दौरान जुड़ने वाले अतिरिक्त खर्च को नियंत्रित करना है।

सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से कैंसर के मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। कैंसर का उपचार कई बार लंबे समय तक चलता है और मरीजों को नियमित रूप से महंगी दवाओं की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कीमतों में कमी परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में मदद कर सकती है।

इससे पहले वर्ष 2019 में भी 42 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने की कार्रवाई की गई थी। उस कदम से कई ब्रांड की कीमतों में कमी आई थी।

नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। इसके बाद खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को संबंधित दवाएं संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य पर उपलब्ध करानी होंगी। दवा कंपनियों को सप्लाई चेन में हुए बदलावों की जानकारी देनी होगी…जबकि राज्य के औषधि नियंत्रक कीमतों से जुड़े नियमों के पालन पर निगरानी रखेंगे।

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