विश्व गौरैया दिवस

उत्तराखंड, आखिर कहां गई आपके बचपन की वह प्यारी सी गौरैया sparrow ?

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

क्या आप जानते हैं आपके बचपन की वह प्यारी सी गौरैया जो अब धीरे-धीरे गायब हो रही है आखिर क्यों आपके घर की गौरैया, जिसे आप हाउस स्पैरो कहते हो, कहां जा रही हैं? क्यों आखिर समाज यह उम्मीद कर रहा है कि वह स्वयं को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए कुछ भी कर सकता है? अपनी भौतिक सुख सुविधाओं के लिए समाज के पारस्परिक तंत्र को तोड़ सकता है.? आज वह वक्त आ गया है जब आपको यह समझना होगा कि जितना जरूरी आपका जीवन है उतना ही जरूरी इस पर्यावरण के लिए हर जीव, जंतु का? और आज विश्व गौरैया दिवस है लिहाजा यह समझना जरूरी है कि आखिर हमारे बचपन की प्यारी सी गौरैया हमसे क्यों दूर होती जा रही है.sparrow

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड बोर्ड रिजल्ट काउंटडाउन शुरू: बोर्ड रिजल्ट पर आया बड़ा अपडेट
सौजन्य से सोशल मीडिया

गौरैया जो कभी बचपन में हर बच्चे के लिए सपनों की उड़ान की तरह सामान्य जीवन में घर के इर्द-गिर्द आसपास, आंगन में छत में दिखती थी, अब वह धीरे-धीरे लुप्त हो रही है शायद बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि पृथ्वी की सबसे संवेदनशील चिड़िया गौरैया है. यह इतनी अधिक संवेदनशील है की रेडियो की तरंगे भी इसको घायल कर सकती हैं और किसान बिना इसके अपने खेतों में अनाज को संक्रमण से बचाने की कल्पना भी नहीं कर सकते, sparrow

सौजन्य से सोशल मीडिया

गौरैया ( sparrow ) यानी (पासर डेमोस्टिकस) छोटी सी सुंदर सी चिड़िया जो यूरोप और एशिया में सामान्य रूप से हर जगह हर घर पाई जाती है, यही नहीं विश्व में जहां जहां इंसान गए, वहां वहां इंसान के पीछे गौरैया भी गई. गौरैया जिसके सिर के ऊपरी भाग और पंख भूरे रंग के होते हैं और गला और आंखों में हल्का काला रंग होता है यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घर के आसपास ही रहना ज्यादा पसंद करती है, क्योंकि यह हर उस जलवायु जो शहरों कस्बों गांवों और खेतों के आसपास होता है उसे पसंद करती है, World Sparrow Day

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में फिर कांपी धरती, यहाँ दो बार महसूस हुए भूकंप के झटके
सौजन्य से सोशल मीडिया

पृथ्वी में गौरैया की 6 प्रजातियां होती हैं जिसमें हाउस स्पैरो, स्पेनिश स्पैरो, सेंड स्पैरो, रसैट स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो है लेकिन पिछले कई दशक से लगातार कम हो रही हमारी यह प्यारी चिड़िया चिंता का विषय बनती जा रही है, बहु मंजली बनती इमारतें, खत्म होते पुराने घर इसके आशियाने को खत्म करने पर तुले हैं, यही नहीं मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगें भी गौरैया के लिए बेहद घातक सिद्ध मानी जाती हैं, इसके अलावा इस तरह की तरंगे गौरैया के प्रजनन पर भी विपरीत असर डाल रही है यही वजह है कि आज घर गांव और गलियों से आपके बचपन की यह प्यारी चिड़िया निरंतर लुप्त होती जा रही है। World Sparrow Day

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: GB पंत यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए आया UPDATE
सौजन्य से सोशल मीडिया
ADVERTISEMENTSAd Ad Ad
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें