उत्तराखंडः(शाबास)-सोमेश्वर की बेटी बनी एयरफोर्स में फ्लाईंग ऑफिसर, बिना कोचिंग के रच दिया इतिहास
Almora: वीरों की भूूमि कही जाने वाली सोमेश्वर घाटी का नाम एक बार फिर पहाड़ की बेटी ने रोशन किया है। सोमेश्वर की बेटी मेनका भोजक ने एयरफोर्स में फ्लाईंग ऑफिसर बनकर सोमेश्वर ही नहीं पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। बेटी आफिसर पर परिवार में खुशी का माहौल है। लोग उनके घर पर बधाई देने पहुंच रहे है।
सुतोली गांव की निवासी है मेनका
जी हां हम बात कर रहे है मूलरूप से अल्मोड़ा जिले सोमेश्वर तहसील सुतोली गांव निवासी व वर्तमान में हल्द्वानी के ऊंचापुल में रहने निवासी कैप्टन बीएस भोजक की बेटी एयरफोर्स में फ्लाईंग ऑफिसर बनी है। उनकी इस सफलता से हल्द्वानी से सोमेश्वर तक खुशी का माहौल है। जानकारी देते हुए पिता कैप्टन बीएस भोजक ने बताया कि मेनका बचपन से ही मेधावी रही। बेटी की शुरूआती शिक्षा पिथौरागढ़ से हुई। इसके बाद 10वीं और 12वीं की पढ़ाई मेनका ने पुणे पूरी की। इसके बाद बीकॉम किया।
परिवार में देशभक्ति का माहौल
परिवार में भारत मां के प्रति प्रेम देखकर मेनका का मन में भी देशसेवा करने की ललक जगी। परिवार में उसके दादा स्व. नीत सिंह सेना से रिटायर्ड हुए थे। पिता कैप्टन बीएस भोजक देशसेवा में तत्पर है। ताऊ राजेन्द्र सिंह भोजक 17 कुमाऊं से सेवानिवृत है और चाचा सूबेदार के पद पर है। ऐसे में बचपन से सेना के प्रति परिवार की सेवाभाव देख मेनका के मन भी देशसेवा की लौ जग उठी। इसके पूरा करने के लिए मेनका ने बिना कोचिंग 400 यूट्यूब चैनलों की मदद से एयन फोर्स की तैयारी शुरू कर दी। मेनका दो बार लिखित परीक्षा में पास हुई लेकिन एसएसबी में बाहर हो गई। मन में देशभक्ति की भावना ने मेनका को तीसरी बार सफलता दिलाई और गुजरात से टॉपर रही। इसके बाद 27 सितंबर 2024 को उसका चयन एयरफोर्स के लिए हो गया। उनकी टैनिंग हैदराबाद में पूरी हुई। 13 दिसंबर को मेनका ने परेड में अंतिम पग भरते हुए सोमेश्वर का नाम रोशन किया।
हैदराबाद पहुंची 80 साल की दादी
इस खुशी के मौके पर मेनका के पिता कैप्टन बीएस भोजक, माता हीरा देवी, दादी और भाई ने उसके कंधों पर स्टार सजाये। इस दौरान पूरा परिवार गर्व की अनुभूति महसूस करने लगा। इसके बाद परिवार अपने मूलगांव सुतोली सोमेश्वर पहुंचा। जहां परिवार के लोगों ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया। गांव का हर व्यक्ति मेनका की एक झलक पाने के लिए उनके घर पहुंच गया। मेनका की सफलता से सबसे ज्यादा खुश उनकी दादी दिखी,जो 80 साल की उम्र में मेनका का वर्दी में देखने हैदराबाद पहुंच गई। मेनका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के लोगों को दिया है।

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