उत्तराखंड के हर जिले का होगा अपना खास फेस्टिवल, स्थानीय उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी

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देहरादून: उत्तराखंड के स्थानीय मेलों, त्योहारों, संस्कृति और पारंपरिक उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने सभी जिलों को अपने किसी एक प्रमुख पर्व या मेले को वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रत्येक जिले को सालभर का इवेंट कैलेंडर तैयार करने को कहा गया है।

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मेलों को मिलेगी स्थायी पहचान

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक मेलों और उत्सवों को केवल कुछ दिनों के आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इन्हें व्यवस्थित तरीके से विकसित कर उनकी स्थायी पहचान और ब्रांड वैल्यू तैयार की जाए।

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आयोजनों में स्थानीय लोगों, कारोबारियों, कारीगरों और अन्य संबंधित लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ प्रवासी उत्तराखंडियों को भी जोड़े जाने पर जोर दिया गया। इससे प्रदेश की संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

रम्माण और बटर फेस्टिवल पर विशेष जोर

बैठक में चमोली के रम्माण फेस्टिवल को बड़े स्तर पर आयोजित करने की बात कही गई। इसके अलावा उत्तरकाशी के बटर फेस्टिवल जैसे अनोखे आयोजनों को भी व्यापक पहचान दिलाने के निर्देश दिए गए।

पौड़ी और चमोली के शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल और मसूरी विंटर कार्निवल को और आकर्षक एवं व्यवस्थित बनाने पर भी चर्चा हुई।

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वहीं चंपावत में होने वाले इंटरनेशनल एंगलिंग मीट को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और उत्तरायणी मेले में एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिले में निर्यात की संभावनाओं का आकलन करने को कहा। इसके लिए प्रत्येक जिले का बेसलाइन डेटा तैयार किया जाएगा और उसी के आधार पर निर्यात बढ़ाने की योजना बनाई जाएगी।

स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। जीआई टैग वाले उत्पादों की संभावनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और हर जिले के प्रमुख उत्पाद की अलग पहचान बनाने पर भी जोर दिया गया।

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निर्यात के लिए बनेगी स्थायी समिति

निर्यात संवर्धन के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति में उद्योग, वन, आयुष समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों और हितधारकों को शामिल किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड के उत्पादों और पारंपरिक आयोजनों को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। इसके लिए सभी विभागों और जिलों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, श्रीधर बाबू अद्दांकी, युगल किशोर पंत, डॉ. अहमद इकबाल, राजेंद्र कुमार, अपर सचिव अभिषेक रोहिला समेत विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी मौजूद रहे।

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