नैनीताल : उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कोटद्वार के बहुचर्चित विवाद के मामले में याचिकाकर्ता दीपक उर्फ मोहम्मद दीपक को कोई राहत नहीं दी है। न्यायाधीश Rakesh Thapliyal की एकलपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पुलिस जांच में सहयोग करना होगा और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक रूप से शामिल नहीं होना चाहिए ताकि जांच प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने उनके पक्ष से घटना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया…जबकि याचिकाकर्ता भीड़ को शांत करने के लिए मौके पर गए थे। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता भीड़ के साथ धक्का-मुक्की करने वाले वीडियो में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने दीपक और 22 अन्य लोगों को चिन्हित कर मुकदमा दर्ज किया, जिसमें पांच मुकदमे पहले ही दर्ज हैं।
वायरल वीडियो में दीपक कुमार ने बाबा के नाम बदलने की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दुकान 30 साल से अधिक पुरानी है। भीड़ ने पहचान पूछी तो उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक बताया। वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद दीपक को लोगों का समर्थन मिला और उन्हें छोटे-छोटे चंदे मिलने लगे।
इस घटना के बाद 28 जनवरी को दीपक कुमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ दुर्व्यवहार, मोबाइल फोन छीनने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। दीपक कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमा निरस्त करने, परिवार की सुरक्षा और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की थी।

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