एक उम्मीद को मैंने लड़ते देखा
रात का दामन चीरते देखा .
थके पसरे सोए जब थे सब .
मैंने सूरज को लड़ते देखा ,उगते देखा .
फैला रहा था नई उम्मीद ,
मैंने जीवन को उगते देखा .
भरी दुपहरी उलझी गुत्थी
जीवन एक सवाल ?
जैसे पहाड़ के पीछे , खड़े हों दर्जनों पहाड़!
बोलो कितने पहाड़ ?
उलझ उलझ कर इन जालों में ,
सूरज भी मानो हार गया .
फिर जा बैठा गोद उम्मीद की .
सूरज अस्तांचल में सो गया .
उम्मीद कि फिर उग आऊंगा .
गहरी रात भरोसे की है .
कांच सी बिखरी, कांच सी टूटी… उम्मीद .
यूं उमीद का टूटना ठीक नहीं .
जीवन बहती धार नदी की ,
यूं पतवार का छूटना ठीक नही
ठीक नही .ठीक नही .

अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें
👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें
हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें
2 thoughts on “सूरज का सफर”
Comments are closed.



उत्तराखंड: अक्टूबर तक पूरी हों कुंभ 2027 की तैयारियां – मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री धामी से मिले प्रसून जोशी, उत्तराखंड में फिल्म निर्माण पर चर्चा
उत्तराखंड: देहरादून मे हुई प्रशासनिक बड़ी बैठक, कामों की समयसीमा तय
हल्द्वानी :(बड़ी खबर) निजी भूमि पर निजी बाजार संचालित करने के इच्छुक के लिए बन गई पॉलिसी
हल्द्वानी :(बड़ी खबर) DM के निर्देश पर नीद से जागा आबकारी विभाग, पकड़ने लगा कच्ची
किच्छा: किच्छा चीनी मिल बन्दी की प्रथम सूचना:
उत्तराखंड : रेत से भरे डंपर ने बाइक सवार को कुचला,गुस्साई भीड़ ने डंपर में आग लगा दी
हल्द्वानी :(बड़ी खबर) SDM कोर्ट पर विधायक सुमित जमीन में बैठे
उत्तराखंड के दंपती ने यहां ट्रेन के आगे कूदकर दी जान 

Bahut he khoobsurtat or prennadayak
सुक्रिया