CHANDAN NAYAL PRYAWARAN

शाबाश भुला- वास्तव में पहाड़ की तस्वीर बदलने को आतुर है युवा, चाल खाल, खंतियां को पुनर्जीवित करता ये पर्यवरण प्रेमी

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

भीमताल- कहते हैं मेहनत का फल मीठा होता है और यह कहावत अगर सटीक बैठती है तो पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल पर जिन्होंने पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक धरोहर को बचाने के साथ-साथ उन्हें नई पीढ़ी तक हस्तांतरित करने का काम किया है यही वजह है उन्हें अब उनकी मेहनत का फल मिलने लगा है यह तस्वीर है बताने को काफी है कि हमारे प्राकृतिक जलस्रोत नॉले धारे गधेरे धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं और सूखते जा रहे हैं हमारे बुजुर्गों की विरासत में दी जल संरक्षण की तकनीक जिन्हें हम चाल, खाल, खंतियां कहते हैं।

कौथिग, बँटवारु, चक्रचाल, गोपीभिना जैसी उत्तराखंडी फिल्मों के मशहूर निर्देशक और कलाकार अशोक मल का निधन

ADVERTISEMENTSAd

और इन सब को संरक्षित करने का काम किया उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल विधानसभा के ओखल कांडा ब्लॉक के युवा चंदन नयाल ने, जिन्होंने न सिर्फ पर्यावरण के लिए प्रेरणादाई काम किया बल्कि पहाड़ के वर्षा जल संरक्षण के लिए नईगांव के चामा चोपड़ा में 20 से 25 बड़े चाल खाल, 100 से अधिक खँतियाँ तैयार की और बरसात का इंतजार किया।

देहरादून- उत्तराखंड राज्य कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में लिए गए ये निर्णय

मानसून की पहली बरसात ने युवा पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल और उनके साथियों की मेहनत पर चार चांद लगा दिए जिस उद्देश्य से उन उन्होंने इन चाल खाल और खतियां का निर्माण किया था वह आज वर्षा जल संग्रहण से भरी हुई है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: नवरात्रि में डॉ रयाल का भजन गीत लॉन्च

देहरादून- (बड़ी खबर) हाईस्कूल इण्टर की बोर्ड परीक्षा न देने वाले छात्रों को ऐसे किया जाएगा पास

समाज के प्रति कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए चंदन नयाल कहते हैं “हमारे द्वारा बनाए गए चाल खाल खंतियां बारिश के दौरान भर चुकी है इससे वर्षा का जल संरक्षित होकर जमीन में संचित होगा जिससे हमारे जल स्त्रोत नौले, धारे ,गधेरे, पुनर्जीवित होंगे साथ ही हमारा इनको बनाने का उद्देश्य यह भी है क्योंकि यह पूरा चीड का जंगल है जिसमें प्रतिवर्ष आग लगने के कारण मिट्टी की उर्वरा क्षमता खत्म हो चुकी है साथ ही चीन के पैरोल से मिट्टी बहुत सख्त हो चुकी है जिसमें चौड़ी पत्ती के पौधों का पौधारोपण असंभव सा हो रहा था इस क्षेत्र में भूमि में नमी न होने के कारण पौधे मर सकते थे को देखते हुए हमने यह कार्य प्रारंभ किया जिससे अब इस क्षेत्र में नमी बनी रहेगी और साथ ही जानवरों को पानी भी यहां पर प्राप्त हो सकता है”

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड : इस भर्ती की आई अपडेट

CORONA UPDATE- क्वॉरेंटाइन सेंटर से फरार हुआ युवक, प्रशासन में हड़कंप

ADVERTISEMENTS
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें

2 thoughts on “शाबाश भुला- वास्तव में पहाड़ की तस्वीर बदलने को आतुर है युवा, चाल खाल, खंतियां को पुनर्जीवित करता ये पर्यवरण प्रेमी”

Comments are closed.