25 जुलाई से चातुर्मास शुरू, शादी-विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम

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हरिद्वार: देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी के साथ 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य कुछ समय के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसे में जिन लोगों ने इन कार्यक्रमों की योजना बनाई है, उन्हें अब अगले शुभ मुहूर्त का इंतजार करना होगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। सनातन परंपरा के अनुसार चातुर्मास के दौरान विवाह और अन्य शुभ संस्कार नहीं किए जाते। इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठान, जप, तप, कथा, भागवत और रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों का विशेष महत्व माना जाता है।

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जानकारों का कहना है कि इस वर्ष ग्रहों की स्थिति के कारण मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त पहले की तुलना में कम हैं। उपनयन संस्कार के लिए फरवरी 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है…जबकि विवाह और मुंडन के शुभ मुहूर्त नवंबर 2026 से दोबारा शुरू होंगे।

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हरिद्वार में हर साल बड़ी संख्या में लोग विवाह और अन्य धार्मिक संस्कार कराने पहुंचते हैं। मांगलिक कार्यों पर रोक लगने से होटल, धर्मशाला, बैंक्वेट हॉल, टेंट, कैटरिंग, फूल कारोबार और पुरोहितों के कार्य पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ने की संभावना है।

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हालांकि चातुर्मास के दौरान धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कांवड़ यात्रा, कथा, भागवत, जप-तप और अन्य धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इसके बाद चारधाम यात्रा भी फिर रफ्तार पकड़ेगी।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 21 नवंबर को हरिप्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ फिर से होगा।

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