उत्तराखंड- लॉकडाउन (Lockdown) से मुरझा रही राज्य पुष्प ‘बुरांश’ की महक

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

पौड़ी-लॉकडाउन का असर उत्तराखंड के राज्य पुष्प बुरांश पर भी साफ देखा जा सकता है, जो की पहाड़ी क्षेत्रों की सुंदरता के साथ-साथ उसकी आर्थिकी और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बना रहता है, इस बार बुरांश की पैदावार समय से पहले ही हो जाने से इसकी उत्पादकता क्षमता में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है, मुख्यत मार्च आखिरी और अप्रैल में खिलने वाला बुरांश पिछले कुछ वर्षों से जनवरी महा में ही खिलने लगा है, जिसका मुख्य कारण जलवायु में आ रहे लगातार परिवर्तन बताए जा रहे हैं,

BREAKING NEWS- कुमाऊं में बागेश्वर तक पहुंचा कोरोनावायरस, हालात चिंताजनक

ADVERTISEMENTSAd

लगातार बड़ता गर्मी का स्तर इसके समय से पहले होने का मुख्य कारण बताया जा रहा है,पहाड़ी क्षेत्रों में बुरांश रोजगार के साथ स्वास्थ्य के लिए भी अति लाभकारी माना जाता है इसके फूलों से जूस बनाकर पहाड़ी क्षेत्र के लोग अपनी आमदनी करते हैं, जबकि आयुर्वेदिक औषधी बनाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है, हृदय संबंधी बीमारियों में इसके जूस का प्रयोग बहुत ही लाभकारी माना जाता है, मगर इस बार लॉक डाउन की वजह से जो ग्रामीण इसको लेने के लिए जंगल का रुख करते थे वे लोग लॉक डाउन की वजह से नही जा पाए।

यह भी पढ़ें 👉  रुद्रपुर की महिला ने प्रेमी को ट्रक समेत जलाकर मार डाला

बड़ी खबर-CORONA UPDATE- उत्तराखंड में कोरोनावायरस ने लगाया शतक,संख्या 104

जिसके कारण इसके जूस की पैदावार में भी 50 से 60 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है,जिला फल सरक्षण अधिकारी विनित नेगी ने बताया कि इस बार लॉक डाउन की वजह से इसके उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिसके कारण पहाड़ो की आर्थिकी और स्वास्थ्य के लिए अति लाभकारी बुरांश का फूल जंगलों से बाहर नही आ पाया। इससे पहले भी पिछले दो-तीन वर्षों में जलवायु परिवर्तन जारी रहने के कारण इसके उत्पादन में गिरावट आई थी जिला फल सरक्षण अधिकारी विनित नेगी ने बताया कि पहाड़ों में पाए जाने वाला कपाल भी एक ऐसा फल है जो सर्दी खत्म होने के बाद से ही जंगलों में लगने लगता है काफल की अपनी विशेषता है कि इसके सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: दर्दनाक हादसा, टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन का अगला हिस्सा पिचका, दो की मौके पर मौत

उत्तराखंड- इस शहर में एक दर्जन अंडों के साथ नजर आया अजगर (PYTHON), मची दहशत (देखें वीडियो)

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड:(बड़ी खबर) कल इस जिले में छुट्टी घोषित

यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है ये पहाड़ों में लोगों की आर्थिकी का भी साधन है महिलाएं इस फल को चुनकर अपने मुख्य बाजारों में इन्हें बेचकर कुछ आमदनी भी हासिल करती है हालांकि अब लगातार हो रहे मौसम परिवर्तन के कारण काफल भी पहाड़ी जिंदगी से दूर होता जा रहा है सरकार को इसके संरक्षण के लिए भी कोई ठोस कदम उठाना चाहिए जिससे स्वास्थ्य के साथ-साथ पहाड़ की आर्थिकी में भी अपना योगदान देने वाला का फल भी आने वाले समय में विलुप्त न हो जाए।

उत्तराखंड- प्रवासियों की पीड़ा को लेकर MLA मनोज रावत व्यथित, सीएम को लिखा पत्र

ADVERTISEMENTSAd AdAd Ad
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें