उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार को बागेश्वर में पंचायत स्तर पर कोरोना महामारी से निबंटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाने के निर्देश देने को कहा है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।
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गरुड़ निवासी अधिवक्ता डी.के.जोशी की जनहित याचिका पर वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशू धूलिया और न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठानी की खंडपीठ ने सुनवाई की । याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कहा था की अभी भी जरूरी फण्ड ग्राम सभाओं को उपलब्ध नही कराया गए हैं। सुनवाई के दौरान याची ने न्यायालय में बागेश्वर जिले के गरुड़ विकास खंड में हो रही घोर लापरवाही को उजागर करने वाली जमीनी हकीकत को तथ्य समेत रखा । उन्होंने बताया की महामारी में जहाँ प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारियों को तत्परता से काम करना चाहिए था, इसके विपरीत कई ज़िम्मेदार अधिकारी सहित उपजिलाधिकारी गरुड़, खंड विकास अधिकारी गरुड़ शिकायत करने वाले ग्राम प्रधानों के मोबाइल नंबर ब्लॉक कर चुके हैं, ताकि उनसे संपर्क नहीं हो सके। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनका खुद का व्हाट्स एप नम्बर भी एस.डी.एम. गरुड़ द्वारा ब्लॉक किया गया है ।
याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट में यह तथ्य भी सामने रखे गए कि आशा व् आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को नियमित रूप से क्वारेन्टीन सेंटर में उचित देखभाल करने व बाहर से आ रहे लोगो का ब्यौरा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी है, लेकिन ऐसे कार्यकर्ताओ को मास्क, ग्लव्स आदि के लिए कोई अतिरिक्त फण्ड नहीं दिया जा रहा है, जिसकी व्यवस्था उन्हें खुद के खर्चे से करनी पड़ रही है।
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खण्डपीठ ने जरूरी फण्ड मुहैया कराए जाने संबंधी इस जनहित याचिका में सुनवाई के बाद सचिव स्वास्थ्य से जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाने के निर्देश जारी करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 जून को तय की है।
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2 thoughts on “बागेश्वर में कोरोना महामारी से निपटने के लिए अधिकारियों से हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर मांगी रिपोर्ट, ये है पूरा मामला”
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बहुत अच्छा किया
गांव में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हैं |जो लोग बाहर से आ रहे है|
न तो खाने की व्यवस्था है और ना ही सोने के लिये है|
प्रधान कह रहे हैं कोई फंड राज्य सरकार ने नही दिया है |
जब कि बजट आ चूका हैं |
bageshwar district magistrate को इस बात पर अमल करना चाहिए |
धन्यवाद पहाड़ टीवी का…….
मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद