बागेश्वर नगर में रहने वाले दिव्यांग पप्पू तैराक नाम से मशहूर पप्पू लाल पुत्र दीवानी राम निवासी- मेहनरबूंगा, बागेश्वर जब शारीरिक रूप से स्वस्थ्य थे, तो इन्होंने सरयू नदी में डूबते हुए कई लोगों को बिना अपनी जान की परवाह करते हुए बचाया गया तथा नुमाइश्खेत मैदान में होने वाले खेलों के दौरान गेंद के नदी में जाने पर भी इन्ही के द्वारा नदी से गेंद निकाली जाती थी। पांव में चोट हो या कभी बुखार लेकिन इनके द्वारा इस तरह के मानवीय कार्य किये जाते रहे, देखते ही देखते कुछ समय पश्चात घाव लगने व नदी के पानी से इनके पैर संक्रमित हो गये। आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण पप्पू तैराक पूर्णरूप से अपने पैरों का इलाज नहीं करा सके और धीरे-धीरे उनको व्हिल चियर का सहारा लेना पड़ा।

परन्तु पप्पू तैराक द्वारा कभी भी अपनी बीमारी के उपचार के लिए किसी से मदद नहीं मांगी व चुपचाप सहता रहा। जहां वो कभी लोगों को बचाने के लिए व बच्चों के गेंद के लिए बिना सोचे नदी में कूद जाता था, वहीं आज व्हिल चियर से नगर में घूम-घूमकर अपना जीवन जीते हुवे अपने दर्द को बिना बताये सहते रहा। विगत दिनों से हो रहा दर्द जब दिनांकः 29-04-2020 को असहनीय हुआ तो स्थानीय लोगों व पुलिस द्वारा पप्पू तैराक को जिला चिकित्सालय बागेश्वर में भर्ती कराया गया। जिसका दिनांकः 30-04-2020 को चिकित्सकों द्वारा आॅपरेशन किया गया तथा कुछ दिनों तक चिकित्सालय में रखा जाएगा। निस्वार्थ भाव से बिना जान की परवाह किये नदी में डूबते हुए लोगों को बचाने के लिए जनपद पुलिस ने पप्पू तैराक को सैल्यूट किया।
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1 thought on “बागेश्वर- एक कहानी नदी में डूबते हुए लोगों को बचाने वाले पप्पू तैराक की.”
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हिमांशु दा हमारे बागेश्वर के ऐसे वीर के लिए मेरी शब्दावली में शब्द नहीं खोज पा रहा हूं परन्तु ऐसे वीर लोगों को भी सरकार की ओर से एक नई पहल की शुरुआत करनी चाहिए कि वह अपनी दिनचर्या को चला सकें, वैसे भी ऐसे हैं ही कितने लोग जो अपनी जान जोखिम में डालते हैं,
बस नैनीताल में भी जब में पढ़ता था तब एक नाम सुनने को मिलता था, जिन्हें हनुमान के नाम से जाना जाता था और वो ही नैनी झील में बचाव वो अगर कोई व्यक्ति डूब गया तो वह उसे बाहर निकाल के साथ लाते थे, उनके द्वारा ही बताया गया कि नैनीताल की सतह पर जाने से पहले पहाड़ नुमा कई सृंखला हैं…… दीपक उपाध्याय