Dehradun News- पिछले लंबे समय से सोशल मीडिया में उठी आवाज़ ,आगे चलकर समाज की दिशा और दशा बदलने में बेहद किफायती और कारगर साबित हुई है कई बार ऐसा हुआ है कि सोशल मीडिया में उठने वाली मांगों को सरकार ने अपने एजेंडे में तक शामिल किया और उसे पूरा भी करना पड़ा, ऐसी ही एक मांग इन दिनों उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर जमकर ट्रेंड कर रही है, वह उत्तराखंड में भू कानून लाने की आवाजें, जो अब चौतरफा आने लगी है। टि्वटर हो फेसबुक इंस्टाग्राम हो या अन्य सोशल मीडिया साइट सभी जगह उत्तराखंड मांगे भू कानून ट्रेंड कर रहा है।
उत्तराखंड में भू कानून के इतिहास पर अगर नजर डालें तो राज्य बनने के बाद 2002 में अन्य राज्यों के लोग यहां 500 वर्ग मीटर जमीन खरीद सकते थे 2007 में इसकी सीमा ढाई सौ वर्ग मीटर कर दी और वर्ष 2018 में सरकार ने जो फैसला लिया उसे सभी ने चौंका कर रख दिया। क्योंकि 6 अक्टूबर 2018 को सरकार ने अध्यादेश लाकर उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 में संशोधन विधेयक पारित करते हुए उसमें धारा 143 क और धारा 154 (2) जोड़कर पहाड़ों में भूमि खरीद की अधिकतम सीमा समाप्त कर दी।
और अब वर्तमान समय में सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रहे उत्तराखंड मांगे भू कानून को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही है लोगों का यह भी कहना है कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा, रहन-सहन और पौराणिक सभ्यता के खतरे की घंटी है ऐसे में अब लोग हिमांचल जैसे सख्त भू कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।
हिमाचल की भू कानून पर अगर नजर डालें तो 1972 में हिमाचल राज्य का भू कानून बनाया गया जिसमें कहा गया कि बाहरी लोग अधिक पैसे वाले लोग हिमाचल की जमीन खरीद ना सके, हिमाचल के लोग व सत्ता पर काबिज लोगों की आशंका थी कि, हिमाचली लोग बाहरी लोगों को चंद रुपए में जमीन बेच सकते हैं लिहाजा, वहां भू कानून लाया गया, हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार द्वारा यह कानून बनाया गया था, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश यहां के भू कानून की धारा 118 के तहत हिमाचल में कृषि भूमि नहीं खरीदी जा सकती गैर हिमाचली नागरिक को यहां जमीन खरीदने की इजाजत नहीं है, लेकिन कॉमर्शियल प्रयोग के लिए आप जमीन किराए पर ले सकते हैं, लेकिन 2007 में धूमल सरकार ने धारा 118 में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया कि जिसे हिमाचल में 15 साल रहते हुए होगे वह यहां जमीन खरीद सकता है, विरोध करने के बाद किसको 30 साल कर दिया गया है लिहाजा सोशल मीडिया में ट्रेंड करते हुए लोगों का कहना है जब हिमाचल में सख्त कानून बन सकता है तो उत्तराखंड में क्यों नहीं??

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