देखो, आया नया उजियारा,
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा,
बदल गए हैं रंग सारे,अम्बर को तितलियाँ सवारें ।
धरती को फूलों ने महकाया,
भवरों संग बच्चों ने यही गुनगुनाया,
बसंत ऋतु खुशियाँ लाया ।
चिड़िया चहकी,कलिया महकी और महके आँगन,
फूल-फूल देई, छम्मा देई, करते घर घर नंदन।
लहरा रहे है खेत सारे,भर गए भंकार तुम्हारे,
गुड़-चावल देदे माई,भर दे बस्ते हमारे ।
बदल गए है रंग सारे,झूम रहे हैं बच्चे प्यारे ।
अब, बदल गए हैं रंग सारे,
न महके चिड़िया ,न महके आँगन,
खाली हो गए पर्वत सारे,औझल हो गए नंदन।
कोई भौंरा महकाये आँगन को,माई देख रही है देली को ,
बदल गए है रंग सारे, फूल-फूल देई खेलते व्हाट्सएप्प सहारे ।।
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4 thoughts on “बदल गए हैं रंग सारे..”
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Life ki har situation chahe wo achhi ho ya buri Haren k andar usko handel karne ki ek anokhi kla thi. Iske ander ek FIGHTER h.
Ye (badal gye h rang saare) padne k baad pta lga ki iske andr ek WRITER bhi h.
I relate so much these lines.
अब, बदल गए हैं रंग सारे,
न महके चिड़िया ,न महके आँगन,
खाली हो गए पर्वत सारे,औझल हो गए नंदन।
कोई भौंरा महकाये आँगन को,माई देख रही है देली को ,
बदल गए है रंग सारे, फूल-फूल देई खेलते व्हाट्सएप्प सहारे ।।
thx
sukriya