
यात्रा वृत्तांत (तृतीय भाग) उत्तराखंड के कपकोट विधानसभा के कलाग ग्रामसभा की दर्द भरी कहनी.
हम चिंणाग गांव होते हुवे आगे बढ़ने लगे , उसी गांव के एक बुजुर्ग से

हम चिंणाग गांव होते हुवे आगे बढ़ने लगे , उसी गांव के एक बुजुर्ग से

देवभूमि उत्तराखंड में 33 कोटि देवी देवता विराजमान है लिहाजा यहां भूलोक में प्रकट होकर

बचपन की यादों को जोड़ता तोड़ता में अपने घर जाने के रास्ते को याद करने

शब्दो का हिमनद अति हिमपात के कारण बहने को तैयार है और भावनाओं की झील

तस्वीरें सब कुछ बयां करने को काफी है और मन भी कहता है कि शायद


7 मई 2017 सुबह के साढ़े आठ बजे पहाड़ की सर्पीली सड़क में दौड़ती मेरी

उत्तराखंड में कुमाऊ की काशी के नाम से मशहूर बाबा बाघनाथ की धरती बागेश्वर में