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देहरादून- सीएम रावत ने किया एक ऐसी किताब का विमोचन जिसमें भारत के सबसे बड़े सस्पेंशन पुल की संघर्ष की गाथा

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देहरादून-/हल्द्वानी/ लालकुआं– मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा वरिष्ठ पत्रकार व सामाजसेवी शीशपाल गुसाई द्वारा लिखित पुस्तक ’’भारत के सबसे बड़े सस्पेंशन पुल डोबरा- चांठी की गाथा’’ का एक सादे समारोह विमोचन किया। विमोचन के अवसर मुख्यमंत्री रावत ने पुस्तक के कुल 208 पेज एक एक कर पढ़े तथा एक- एक पुल की, और घाटी की चर्चा की। उन्होंने कहा घोंटी पुल का सवाल उन्होंने बतौर विधायक 2004 में विधानसभा में उठाया था। पुस्तक में दोनों घाटियों में भागीरथी और भिलंगना में टिहरी झील में कुल 18 पुल डूबे और 6 नए पुल बने का जिक्र है। उन्होने कहा कि पुस्तक भविष्य के लिए एक मजबूत दस्तावेज है। वरिष्ठ पत्रकार श्री वेद विलास उनियाल कहा कि इसमें डूबी हुई चीजों का सचित्र इतिहास है जो बहुत उपयोगी है।

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मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार दर्शन सिंह रावत ने बताया कि, पुस्तक में आंकड़े बहुत ही शानदार दिए गए हैं जो हमेशा पठनीय रहेंगे। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र जोशी ने कहा की पुस्तक पढ़ने लायक है। खास कर नई जनरेशन को वो पुल घाटी देखने पढ़ने को मिलेगी, जो अब नहीं रही है।
समारोह में उपस्थित पदम श्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि सचित्र वर्णन होने के चलते पुस्तक सभी वर्ग के पाठको लिए उपयोगी है।


पुस्तक में डोबरा चांठी पुल में जिसका भी प्रयास रहा उसको ईमानदारी से दर्शाया गया है चाहे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी हों पूर्व विधायक श्री फूल सिंह बिष्ट हों, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हों, पूर्व विधायक विक्रम सिंह नेगी हों, वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हों, या वर्तमान विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पंवार हों, निष्पक्ष होकर इनके योगदान को लिखा गया है। शासन के सचिव जो अपने राज्य के लिए काम करते हैं अमित नेगी की इस बहुप्रतीक्षित पुल को बनाने के लिए शासन में जो सक्रियता रही स्थान मिला है। सिंचाई विभाग पुनर्वास, लोक निर्माण विभाग कोरियाई इंजीनियर निजी कंपनी के इंजीनियर का नाम और काम सहित वर्णन है।

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा की लंबी भूख हड़ताल के बाद बनी हनुमंतराव कमेटी की सिफारिशों से प्रभावित क्षेत्रों में संरचनात्मक विकास होना शुरू हो गया था का जिक्र है साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुविधाओं और झील न भरने के लिए 3 पीआईएल का उल्लेख है। टिहरी बांध के गेट का विरोध करने के लिए जो नेता नई टिहरी और हरिद्वार जेल गए उनका जिक्र है।
सेम मुखेम की दूरी घटी है और उसका इतिहास भी लिखा गया है साथ ही उत्तरकाशी की गाजना पट्टी और बूढ़ा केदार क्षेत्र को भी डोबरा चांठी पुल से फायदा होगा का उल्लेख है।
डोबरा चांठी पुल के बारे में पुस्तक के 146 पेज से 198 पेज तक तारीख दर तारीख घटना को लिखा गया है। पुल के तकनीकी बिंदुओं कितना लोहा लगा कहां से बनकर लोहा या सब कुछ किताब में है।

वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी शीशपाल गुसाई द्वारा लिखित “भारत के सबसे बड़े सस्पेंशन पुल डोबरा- चांठी की गाथा’’ नामक पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया। डोबरा चांठी पुल के बारे में पुस्तक के 146 पेज से 198 पेज तक तारीख दर तारीख घटना को लिखी गयी है। पुल के तकनीकी बिंदुओं कितना लोहा लगा कहां से बनकर लोहा सहित सब कुछ किताब में है अंकित है। श्री गुसाई ने बताया कि पुस्तक में दोनों घाटियों में भागीरथी और भिलंगना में टिहरी झील में कुल 18 पुल डूबे और 6 नए पुल बने का जिक्र है जो भविष्य के लिए एक मजबूत दस्तावेज भी होगा। उन्होंने बताया कि इसमें डूबी हुई चीजों का सचित्र इतिहास दृशाया गया है।

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उन्होंनं कहा कि डोबरा चांठी पुल में जिसका भी प्रयास रहा उसको ईमानदारी से दर्शाया गया है। उसमें चाहे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी हों पूर्व विधायक फूल सिंह बिष्ट हों, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हों, पूर्व विधायक विक्रम सिंह नेगी हों, वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हों, या वर्तमान विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पंवार हों, निष्पक्ष होकर इनके योगदान को लिखा गया है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा की लंबी भूख हड़ताल के बाद बनी हनुमंतराव कमेटी की सिफारिशों से प्रभावित क्षेत्रों में संरचनात्मक विकास होना शुरू हो गया था का जिक्र है साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुविधाओं और झील न भरने के लिए 3 पीआईएल का उल्लेख है। टिहरी बांध के गेट का विरोध करने के लिए जो नेता नई टिहरी और हरिद्वार जेल गए का भी जिक्र है।

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