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सुर सम्राट स्व गोपाल बाबू गोस्वामी

चौखुटिया- इस महान लोक गायक की 24 वी पुण्यतिथि आज, कभी इनके गीतों में झूमता था पहाड़, जो आज भी है अमर

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चौखुटिया- उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक स्व. गोपाल गिरी गोस्वामी को लोग गोपाल बाबू के नाम से जानते हैं। उनका जन्म चौखुटिया बाजार से लगे ग्राम पंचायत चांदीखेत में दो फरवरी 1942 को मोहन गिरी गोस्वामी के घर हुआ था। बचपन से ही गीतकार बनने के जुनून में उन्होंने पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया। वह 12 साल की उम्र से ही गीत लिखने और गाने लगे थे। जीवन के 54 साल में उन्होंने साढे़ पांच सौ गीत लिखे।

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उनका पहला गीत ‘कैलै बजे मुरूली औ बैंणा ऊंची ऊंची डान्यूमा’ आकाशवांणी नजीबाबाद से प्रसारित हुआ था। 1972 में भारत सरकार के गीत और नाटक प्रभाग में नियुक्ति के बाद गोस्वामी को अपना हुनूर दिखाने का अच्छा मंच मिल गया। यहीं से उनके गीतों की संख्या और लोकप्रियता बढ़ती चली गई। सेवा के दौरान ही बीमारी के चलते 26 नवंबर 1996 को काल के क्रूर हाथों ने एक महान गीतकार को हमसे छीन लिया। लोक संस्कृति, रीति रिवाज ही नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र को छूने वाले उनके गीत हमें हमेशा उत्प्रेरित करते रहेंगे.

कोरोनकल में ऐसे मनाई सुर सम्राट स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी की पुण्यतिथि, धर्मपत्नी और पुत्रों ने पिता को किया याद

उत्तराखंड के सुर सम्राट स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी की 24वीं पुण्यतिथि विगत सात वर्षों से मुंबई महानगरी में पर्वतीय झंकार टीम द्वारा मनाई जा रही थी, लेकिन इस बार कोरोनाकाल के चलते कार्यक्रम मुंबई में नहीं हो सका। उनकी पुण्यतिथि पर आज उनके निवास स्थान चांदीखेत चौखुटियां में स्व. गोपाल बाबू की धर्मपत्नी मीरा गोस्वामी व उनके पुत्र गिरीश गोस्वामी, अशोक गोस्वामी, जगदीश गोस्वामी और लोकगायक रमेश बाबू गोस्वामी उनके समाधि स्थल पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें याद किया। इस दौरान उनके साथ पूरे गोस्वामी समाज के लोग ने स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी को नमन करते हुए उन्हें याद किया।

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बता दें कि हर साल मुंबई में देवकी नन्दन कांडपाल व उनकी पूरी टीम द्वारा उत्तराखंड के सुर सम्राट स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी की पुण्यतिथि का भव्य आयोजन किया जाता है। हर साल पर्वतीय झनकार टीम मुंबई द्वारा कई कलाकारों को गोस्वामी जी के नाम पर अवार्ड से नवाजा जाता है। अभी तक लोकगायक स्व पप्पू कार्की, लोकगायक स्व. हीरासिंह राणा व लोकगायिका दीपा पन्त यह अवार्ड दिया गया है। इस बार कोरोनाकाल के चलते कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
आज पर्वतीय झंकार टीम के अध्यक्ष हयात सिंह राजपूत, सचिव दीवान सिंह रतूड़ी, कोषाध्यक्ष भैरवदत्त शर्मा, सांस्कृतिक सचिव देवकी नन्दन कान्डपाल, संस्थापक आशा कांडपाल, संरक्षक शेखर उपाध्याय, संरक्षक कमल बेलाल, कार्यकारिणी सदस्य जीवन सिंह बिष्ट, संरक्षक प्रदीप सिंह रावत, विशेष सहयोग देवेन्द्र सिंह कोरंगा, शिवदत्त पंत, हरीश बिष्ट, दिनेश फुलारा, गणेश कांडपाल ने दीप प्रज्वलित कर उन्हें याद किया।

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वही 24वीं पुण्यतिथि पर सुर सम्राट स्व गोपाल बाबू गोस्वामी जी को याद करने वालोंं मेें लोकगायक बीके सामंत, शिवदत्त पंत, देवकी नंदन कांडपाल, बिशन हरियाला, कौशल पाण्डे, दीपा नगरकोटी, हरिमन दा, मेघना चन्द्रा, नवीन रावत, किशोर राधे, मुकेश शर्मा, दीपिका किरौला, राहुल भट्ट, मुकेश बिष्ट और भगवत मनराल शामिल थे।

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