पूर्वांचल का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है छठ पूजा, दीपावली के बाद से इसकी तैयारियों में सभी पूर्वांचल सहित बिहार के लोग पूरे हर्षोल्लास के साथ इस त्यौहार की तैयारी में जुट जाते हैं उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में पूर्वांचल समाज के लोग निवास करते हैं लिहाजा यहां भी छठ पर्व को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर को है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से होती है, इसके अगले दिन खरना होता है, तीसरे दिन छठ पर्व का प्रसाद तैयार किया जाता है और स्नान कर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व के चौथे और आखिरी दिन उगले सूर्य की आराधना की जाती है। इस तरह चार दिवसीय छठ पर्व पूर्ण होता है। धर्म वैज्ञानिक पंडित वैभव जोशी के अनुसार छठ पूर्व में सूर्य की आराधना का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता हैं। कहा जाता है कि छठ पर्व में सूर्य की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति तथा संपन्नता प्रदान करती हैं। छठ पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है।
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पूजा के मुहूर्त– 20 नवंबर छठ पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 06:48 पर होगा तथा सूर्यास्त शाम 17:26 पर होगा। वैसे षष्ठी तिथि एक दिन पहले यानी 19 नवंबर को रात 9:58 से शुरू हो जाएगी और 20 नवंबर को रात 9:29 बजे तक रहेगी। इसके अगले दिन सूर्य को सुबह अर्घ्य देने का समय छह बजकर 48 मिनट है।
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छठ पूजा में किस दिन क्या होता है-
पहला दिन (नहाय खाय): व्रत रखने महिलाएं स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं। शाम को शाकाहारी भोजन होती है।
दूसरा दिन (खरना): कार्तिक शुक्ल पंचमी को महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को भोजन करती हैं। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाई जाती है।
तीसरे दिन (षष्ठी के दिन): इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। प्रसाद व फल बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं। टोकरी की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य को अर्ग देने और पूजा के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाती हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा की जाती है।
चौथे दिन: सूर्योदय के समय भी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांट कर छठ पूजा संपन्न की जाती है। छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं के द्वारा शकरकंद, लौकी एवं गन्ने की खरीदी की जा रही है। वहीं पर्व को देखते हुए बाजार में इनकी आवक बढ़ गई है।
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