उत्तराखंड में शुरू हुई नंदा देवी की बड़ी जात, कुरुड़ से कैलाश रवाना हुई यात्रा

KhabarPahad-App
खबर शेयर करें -

उत्तराखंड में शुरू हुई नंदा देवी की बड़ी जात, कुरुड़ से कैलाश रवाना हुई यात्रा

12 साल में एक बार होने वाली प्रसिद्ध मां नंदा बड़ी जात यात्रा आज से शुरू हो गई है. 30 सितंबर को समापन होगा.

ADVERTISEMENTSAd

चमोली: हिमालय महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध मां नंदा की बड़ी जात यात्रा शनिवार पांच सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना हो गई. मां नंदा की डोली के रवाना होते ही पूरा कुरुड़ क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा. डोली के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए.

सिद्धपीठ कुरुड़ में मां नंदा राजराजेश्वरी की पांच दिवसीय पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद डोली को कैलाश के लिए विदा किया गया. विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं.

विश्व की सबसे लंबी पैदल यात्रा: मां नंदा देवी की यात्रा विश्व की सबसे लंबी करीब 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा है. सामान्य लोकजात यात्रा के दौरान मां नंदा की डोली विभिन्न गांवों और पड़ावों से होते हुए वेदनी कुंड तक पहुंचती है, लेकिन इस बार बड़ी जात यात्रा का मार्ग आगे बढ़ाते हुए डोली को सीधे होमकुंड तक ले जाया जाएगा. यहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद बड़ी जात यात्रा का समापन होगा.

यह भी पढ़ें 👉  धामी सरकार का बड़ा एक्शन! सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के मकानों पर चला बुलडोजर

कुरुड़ से रवाना होने के बाद मां नंदा की डोली यात्रा के निर्धारित पड़ावों से होकर हिमालयी क्षेत्र की ओर बढ़ेगी. यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालु मां की डोली का स्वागत करेंगे और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेंगे. यात्रा के अंतिम चरण में डोली होमकुंड पहुंचेगी, जहां धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे.

बड़ी जात यात्रा को लेकर चमोली ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. 12 वर्ष बाद आयोजित हो रही इस बड़ी जात यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है. जगह-जगह मां नंदा के जयकारों और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है.

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड : शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित हुए ये 19 शिक्षक

30 सितंबर को होमकुंड में होगा समापन: बड़ी जात यात्रा का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान 30 सितंबर को होमकुंड में प्रस्तावित है. यहां मां नंदा की डोली की पूजा-अर्चना और विधि-विधान से धार्मिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद बड़ी जात का समापन होगा. हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर नंदा देवी की लोकजात यात्रा की तिथि तय की जाती है. मां नंदा की डोली विभिन्न गांवों और पड़ावों से गुजरते हुए अपने मायके से ससुराल कैलाश की ओर प्रस्थान करती है. बड़ी जात यात्रा इसी परंपरा का विस्तृत और विशेष धार्मिक स्वरूप है, जिसमें हजारों श्रद्धालु मां नंदा के साथ हिमालय की ओर यात्रा करते हैं.

इस बार क्यों हो रही दो यात्राएं

इस बार दो यात्राएं होने की वजह नौटी आयोजन समिति और कुरुड़ है.

यह भी पढ़ें 👉  BJP की बड़ी तैयारी, हल्द्वानी में 10 सितंबर को जुटेंगे 5 हजार पूर्व सैनिक; नितिन नवीन रहेंगे मौजूद

नौटी आयोजन समिति इस बार नंदा राजजात की तैयारी कर रही थी.

जिसके बाद उन्होंने मलमास का हवाला देते हुए इस साल यात्रा को स्थगित कर दिया.

इसके साथ ही कुरुड़ ने यात्रा के शुरुआती पड़ाव ईड़ाबधाड़ी पर विरोध जताया.

कुरुड़ पक्ष ने कहा यात्रा में उनका अहम स्थान है.

कुरुड़ पक्ष का मानना है कि इस यात्रा का सही नाम बड़ी जात है.

बाद के आयोजनों में इसे राजजात नाम दिया गया.

उन्होंने इसे राजपरिवार से जोड़ा.

कुरुड़ ने कहा इस यात्रा में नौटी और कांसुआ के कुंवरों की भूमिका बढ़ी है.

कुरुड़ की भूमिका नंदा राजजात में कम हुई है.

यात्रा की पुरानी और धार्मिक परंपराओं में आज भी उनका महत्व अधिक है.

इसलिए नौटी आयोजन समिति के यात्रा स्थगित करने के बाद कुरुड़ पक्ष ने बड़ी जात निकालने का फैसला किया.

ADVERTISEMENTSAd AdAd Ad
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें

हमारे इस नंबर 7017926515 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें