उत्तराखंड में मदरसों पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन, देहरादून में 3 और हल्द्वानी में 2 पर कार्रवाई

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देहरादून। उत्तराखंड में नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था के तहत बिना जरूरी मान्यता और निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन किए संचालित हो रहे संस्थानों पर प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में देहरादून और हल्द्वानी में पांच मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, देहरादून में तीन मदरसों के खिलाफ कार्रवाई हुई। आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील कर दिया गया। वहीं मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी, माजरा और मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों ने लिखित अंडरटेकिंग देकर संचालन बंद करने की जानकारी दी है।

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हल्द्वानी में दो मदरसे सील

नैनीताल जिले के हल्द्वानी में भी बिना मान्यता संचालित दो मदरसों पर कार्रवाई की गई। इनमें शनि बाजार रोड, गौजाजाली उत्तर स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना और इंदिरा नगर, बनभूलपुरा स्थित मदरसा शामिल है।

हल्द्वानी के नगर मजिस्ट्रेट एबी वाजपेयी के अनुसार, दोनों संस्थानों के प्रबंधकों से मान्यता से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर दोनों भवनों को सील कर दिया गया।

अब तक 20 मदरसों का संचालन बंद

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है। इसके अलावा तीन मदरसों के प्रबंधकों ने लिखित रूप से संचालन बंद करने की जानकारी दी है। इस तरह कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन बंद कराया गया है।

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नई व्यवस्था में क्या बदला?

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। पहले मदरसा बोर्ड के तहत पंजीकृत संस्थानों को अब नई व्यवस्था के अनुसार निर्धारित मान्यता और शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि बच्चों को उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा उपलब्ध कराना नई व्यवस्था का उद्देश्य है।

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सरकार के अनुसार प्रदेश में पहले मदरसा बोर्ड के तहत पंजीकृत 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत मान्यता लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जो संस्थान निर्धारित प्रक्रिया और मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि शिक्षा संस्थानों को निर्धारित नियमों और मान्यता के तहत ही संचालित किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

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